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मौन रहकर ही नमो को जागृत किया जा सकता है : भाव भूषण महाराज

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मौन रहकर ही नमो को जागृत किया जा सकता है : भाव भूषण महाराज
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हस्तिनापुर। ऐतिहासिक नगरी स्थित कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख, शांति व समृद्धि के लिए 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के तीसरे दिन बृहस्पतिवार को विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य जीवेंद्र जैन, शांतिधारा करने का सौभाग्य विशाल जैन, जीवेंद्र जैन, पंकज जैन, तुषार जैन, देवेश जैन को प्राप्त हुआ। दीप प्रज्ज्वलन उमा जैन, आशिमा जैन, स्वस्ति जैन ने किया। बाल ब्रह्मचारी सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। सभी तीर्थंकरों को अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। धर्मप्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। 101 परिवारों ने विधान का आयोजन कराया।
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गुरुवर भाव भूषण महाराज ने कहा कि मौन सर्वोत्तम साधना है। मौन में इंसान बाहर से भी शांत रहता है और भीतर भी शांति रहती है। मौन रहकर ही नमों को जागृत किया जा सकता है। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन नीरज जैन ने किया।
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आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन रेखा जैन, नेहा जैन, रानी जैन ने किया। चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन ब्रह्मचारी सुनीता दीदी, लीला दीदी एवं गुरुकुल के बच्चों ने किया गया। कार्यक्रम में अध्यक्ष विनोद जैन, महामंत्री मुकेश जैन सर्राफ, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, सह संयोजक मोतीलाल जैन, वीरेंद्र जैन एडवोकेट, अभय कुमार जैन, शिखरचंद जैन का सहयोग रहा।
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