शासन के आदेश पर बन रही बवालियों की सूची में मेरठ जिले के कई नेताओं के नाम भी शामिल किए गए हैं। थाना स्तर पर बनाई जा रही सूची में उन लोगों के नाम शामिल किए गए हैं, जिन पर अंदेशा है कि वह कभी भी सांप्रदायिक हिंसा भड़काकर माहौल खराब कर सकते हैं। सूची में पश्चिमी यूपी के कई बड़े और सक्रिय राजनीतिक दलों के नेता भी शामिल हैं, जो महत्वपूर्ण पदों पर हैं। वे अक्सर ऐसी गतिविधियों में लिप्त रहते हैं।
हालांकि सूची में नाम शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि वे अपराधी हो गए, लेकिन पुलिस की तरफ से यह नाम इसलिए जोड़े गए हैं ताकि इन लोगों पर नजर रखी जा सके। इस तरह की कोई घटना होती है तो शासन के पास ऐसे लोगों का रिकॉर्ड रहे और उन पर समय रहते शिकंजा कसा जा सके। इस सूची को इतने गोपनीय तरीके से तैयार किया जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर किसी को भी इसकी भनक नहीं है।
संवेदनशील हैं पश्चिमी यूपी के जिले
अपराध के साथ-साथ पश्चिमी यूपी राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील है। यहां पर सांप्रदायिक मामले, आतंकी गतिविधियां, रोहिंग्यों की आवाजाही रहती है। इसके अलावा लव जिहाद के मामले भी सामने आते रहे हैं। हाल ही में मेरठ के खरखौदा थाना क्षेत्र से भी एटीएस की टीम ने चार बांग्लादेशियों को पकड़ा है, जो अपनी पहचान छिपाकर यहां रह रहे थे। जिन्होंने अपने आधार कार्ड भी फर्जी बनवा रखे थे। वर्ष 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के खिलाफ भी मेरठ में दंगे हुए थे।
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सूची में दिया गया यह रिकॉर्ड
पुलिस की तरफ से जिन लोगों के नाम सूची में डाले गए हैं, उनके बारे में कई तरह की जानकारी ली गई है। जैसे पारिवारिक स्थिति, किस तरह के मामलों में सक्रिय, कोई केस दर्ज है या नहीं, किस समुदाय से है और स्थानीय लोगों के बीच कितनी पकड़ है। इसके अलावा अन्य जानकारियां भी जुटाई गई हैं।
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