नमामि गंगे परियोजना: मखूदमपुर गंगा घाट पर नदी में छोड़े 119 कछुए
हस्तिनापुर। नमामि गंगे योजना के तहत वन विभाग ने बुधवार को गंगा में 119 कछुए छोड़े। ये गंगा की धारा को अविरल और निर्मल बनाने में भूमिका निभाएंगे। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वनों के दोहन, जल की बर्बाद ने जीवन को संकट में डाल दिया है।
गंगा की जलधारा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए प्रतिवर्ष नमामि गंगे योजना के तहत गंगा में कछुए छोड़े जाते हैं। वर्ष 1987 में गंगा एक्शन प्लान के तहत कछुआ पुनर्वास परियोजना का शुभारंभ किया गया था। इसके तहत हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में कछुआ प्रजनन केंद्र की स्थापना कर कछुआ वन्य जीव विहार बनाया गया था। कछुआ पालन केंद्र में पालित कछुआ शावकों को गंगा में छोड़ा जाता है। बुधवार को वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक एनके जानू, वन संरक्षक गंगा प्रसाद, डीएफओ राजेश कुमार, विश्व प्रकृति निधि कोऑर्डिनेटर संजीव यादव आदि ने गंगा में कछुए छोड़े। उन्होंने कहा कि गंगा की स्वच्छता से ही हमारा जीवन लंबी आयु प्राप्त कर सकता है। मुख्य वन संरक्षक ने कहा कि गंगा में बढ़ते प्रदूषण, वनों के दोहन, जल की बर्बादी ने हमारे जीवन को संकट में डाल दिया है। गंगा में मृत पशुओं व जले, अधजले शवों के प्रवाह के कारण गंगा का जल दिन प्रतिदिन प्रदूषित होता जा रहा है। इसकी रिपोर्ट जल प्रदूषण विभाग निरंतर ले रहा है।
अब तक तीन हजार से ज्यादा कछुए छोड़े
कछुआ परियोजना अधिकारी संजीव यादव ने बताया कि 2013 में मखदूमपुर गंगा घाट से कछुआ पुनर्वास योजना कि शुरूआत की हुई थी। वन विभाग और वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ के संयुक्त अभियान में गंगा नदी में अब तक लगभग 3500 कछुए छोड़े जा चुके हैं।