प्रदेश के परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के शामली में होने के बावजूद नकली रोडवेज बसें सड़कों पर दौड़ती रहीं। इन बसों को न तो आरटीओ अधिकारी ही पकड़ रहे हैं और न ही चौराहों पर खड़ी पुलिस। सत्ताधारी नेताओं की शह पर चल रहीं इन बसों से हर महीने साढ़े तीन करोड़ रुपये राजस्व को चपत लग रही है। वहीं अमर उजाला लगातार इन बसों के खिलाफ खबरें प्रकाशित कर रहा है, लेकिन पुलिस और प्रशासन के अधिकारी कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं हैं।
परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह कैराना चुनाव के चलते सोमवार को मेरठ में थे। उनके यहां होने के बावजूद नकली रोडवेज सिस्टम का मजाक उड़ाती हुई दौड़ती रहीं। मंगलवार को मंत्री शामली में थे। सपा सरकार में हायतौबा मचाने वाले भाजपा नेता भी इन बसों के मामले में चुप्पी साधे बैठे हैं। नेताओं, आरटीओ अधिकारियों और पुलिस के संरक्षण में डग्गामार वाहनों का धंधा खूब फलफूल रहा है। मीडिया में मामला उछलने के बाद भी परिवहन और पुलिस विभाग हाथ पर हाथ रखे बैठा है। कुछ दिन अभियान चलाकर परिवहन विभाग ने इतिश्री कर ली है। सीज की गई बसें फिर से सड़कों पर उतरकर फर्राटा भर रही है।
सोशल मीडिया के सिर फोड़ रहे ठीकरा
आरटीओ प्रवर्तन अधिकारी बसों के संचालन का ठीकरा सोशल मीडिया के सिर फोड़ रहे है। अधिकारियों का कहना है कि डग्गामारों ने व्हाट्सएप ग्रुप बना रखे हैं। जैसे ही टीम अभियान चलाती है तो ग्रुप पर सूचना जारी कर दी जाती है। इसके बाद बसें सड़क से हट जाती हैं।
फिर चलेगा अभियान
एआरटीओ प्रवर्तन दीपक शाह ने बताया कि वे छुट्टी पर गए थे। इसलिए अभियान धीमा हो गया था। अब एक बार फिर से इनके खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।