उप्र निर्वाचन विभाग ने भले ही अभी निगम चुनावों की तिथि घोषित न की हो। लेकिन शासन द्वारा परिसीमन का गजट जारी करते ही चुनावी बिगुल बज गया है। नए परिसीमन में शहर 90 वार्डों में बांटा गया है।
परिसीमन से समीकरण गड़बड़ाए
परिसीमन गजट जारी होते ही राजनीतिक दलों ने सिंबल पर प्रत्याशी उतारने की घोषणा करने की तैयारी शुरू कर दी है, तो संभावित पार्षद प्रत्याशियों ने दावे ठोकने शुरू कर दिए हैं। हालांकि परिसीमन में 80 के स्थान पर 90 वार्ड होने से कई दिग्गजों के समीकरण गड़बड़ा गए हैं। नए प्रत्याशियों ने जीत के लिए उचित वार्डों की तलाश शुरू कर दी है।
गड़बड़झाने के भी आरोप
परिसीमन के दौरान नगर निगम के कई कर्मचारियों पर गडबड़झाले के आरोप लगने शुरू हो गए हैं। आरोप है कि परिसीमन में लगे निगम के एक कर्मचारी ने गणना के दौरान वार्डों से इलाकों का कुछ तरह कटान किया कि ओबीसी और जनरल वार्ड एससी की श्रेणी में आकर खड़े हो गए। हालांकि अभी ओबीसी जाति की जनगणना पूरी न होने के कारण आरक्षण का निर्धारण नहीं हो सका है।
शुरुआत में ही यह हाल
बुधवार को परिसीमन रिपोर्ट सामने आते ही नगर निगम के मौजूदा पार्षद और संभावित प्रत्याशी चुनावी मोड़ में दिखाई दिए। निगम के पार्षद कक्ष में जहां कुछ ने परिसीमन रिपोर्ट के आधार पर चुनाव में हार होना निश्चित मानना शुरू कर दिया, वहीं कुछ के चेहरे खिले भी नजर आए। पार्षद पंकज कतीरा, प्रमोद खड़ौली, दीवानजी शरीफ, हाजी शहीद, रविंद्र तेवतिया आदि का दावा है कि विकास कार्य कराने वाले व्यक्ति को जनता कभी नहीं हराती है। चाहे वह किसी भी वार्ड से चुनाव लड़ लें। उधर चुनाव में आने वाले नए चेहरों से कुछ पार्षदों के चेहरों पर हवाईयां उड़ती नजर आ रही हैं। हालांकि पुराना इतिहास रहा है कि चुनाव में पुराने आठ-दस पार्षद ही जीतकर आते हैँ। विजयी पार्षद सभी अधिकतर नए चेहरे होते हैं। इस बार 90 वार्ड होने से बोर्ड का विस्तार होगा।
नहीं आयी कोई आपत्ति
नगर निगम प्रशासन ने परिसीमन पर जनता से खुली आपत्तियां मांग ली हैं। आपत्ति करने के लिए जनता को एक सप्ताह का समय दिया गया है। बुधवार को आपत्ति का पहला दिन था। नगर निगम लिपिक मदन कुमार ने बताया कि उनके पास पहले दिन कोई आपत्ति नहीं पहुंची है।