एक करोड़ 42 लाख रुपये के खरीदे गए 1500 डस्टबिन के रेट की जांच में फर्जीवाड़ा पाया गया है। नगरायुक्त ने कंपनी के रेट पर ही भुगतान के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि ऑनलाइन डस्टबिन के रेट काफी काम हैं। जांच के बाद ही भुगतान पर रोक लगाई गई है।
अमर उजाला ने निगम के डस्टबिन में गडबड़झाले को उजागर किया था। जिसके बाद नगरायुक्त उमेश प्रताप ने जांच बैठा दी थी। उधर महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने 15 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। नगरायुक्त का कहना है कि डस्टबिन टेंडर कमेटी को ही जांच सौंपी गई है। यह तो स्पष्ट हो ही गया है कि अधिक दामों में डस्टबिन खरीदे गए हैं। डस्टबिन की गुणवत्ता की जांच कमेटी कर रही है।
रेट में भारी अंतर के कारण डस्टबिन के भुगतान पर रोक लगाई है। इनका कहना है कि किसी भी कीमत पर भुगतान नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि चार माह पहले सफाई की कुछ मशीनें जैसे पोर्कलेन, छोटा हाथी आदि वाहन खरीदे गए थे। उनकी तीन स्तरीय जांच करा ली गई है। उनके भुगतान कराने की प्रक्रिया चल रही है।