आठ माह डरे सहमे रहे कर्मचारी नेता शनिवार को अपने तेवर में दिखे। नगरायुक्त के सामने ही भिड़ गए। एक-दूसरे पर जमकर आरोप लगाए और गाली गलौच की। बातों ही बातों में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की पोल खोल दी। इससे कार्यालय का माहौल गरमा गया। किसी तरह से नगरायुक्त ने दोनों पक्षों को शांत कराया।
शनिवार दोपहर 12 बजे नगरायुक्त देवेंद्र कुशवाहा अपने कार्यालय में बैठे थे। तभी एक दरवाजे से कर्मचारी संघ अध्यक्ष अनीस अहमद अपने दो-तीन साथियों के साथ आए। दूसरे दरवाजे से कर्मचारी संघ के महामंत्री लोकेश शर्मा श्रीपाल, बाबूराम सैनी सहित कई पदाधिकारियों के साथ पहुंच गए।
लोकेश शर्मा ने जैसे ही कर्मचारी मृतक आश्रित पदों पर नियुक्ति के संबंध में मांग पत्र नगरायुक्त की तरफ बढ़ाया तो अध्यक्ष अनीस अहमद ने विरोध कर दिया। साथ ही कहा कि मैं कर्मचारी संघ का निर्वाचित अध्यक्ष हूं, जो पत्र हमने पूर्व में दिया है उसी पर विचार किया जाना चाहिए।
इसी बात पर अध्यक्ष और महामंत्री के बीच तू-तू, मैं-मैं शुरू हो गई। महामंत्री ने अनीस अहमद की अध्यक्षता समाप्त होने की बात कही। साथ ही कर्मचारियों की समस्या न सुनने का भी आरोप लगा दिया।
लगभग 15 मिनट तक कर्मचारी नेता हंगामा करते रहे। एक-दूसरे पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगाए। एक कर्मचारी नेता ने इतना तक बोल दिया कि अगर करा सके तो मेरा मर्डर करा दे। नगरायुक्त ने कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों को सामंजस्य बनाने के लिए बैठक करने की सलाह दी।
मृतक आश्रित पदों पर भर्ती पर कहा कि अभ्यर्थी की हाईस्कूल लेबल की हिंदी और अंग्रेेजी की परीक्षा ली जाएगी। परीक्षा पास करने वालों को नौकरी दी जाएगी।
ये था मांग पत्र
कर्मचारी नेताओं की तरफ से नगरायुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि नौ माह पहले निगम के चार-पांच कर्मचारियों की मृत्यु हो गई। उनके परिवार के किसी एक सदस्य को नौकरी दी जानी चाहिए।
उमेश के सामने नहीं बोलते थे नेता
कर्मचारी नेता तत्कालीन नगरायुक्त उमेश प्रताप के कार्यालय तक में नहीं घुस पाते थे। नये नगरायुक्त को आए अभी कुछ ही दिन हुए हैं और उनका हंगामा शुरू हो गया है। आठ माह तक जो कर्मचारी नेता प्रदर्शन तक नहीं कर रहे थे, अब वे आंदोलन की बात करने लगे हैं।