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प्राचीन स्थल को बचाने में जुटी हैं नागा साध्वी

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साध्वी महंत गंगानंद सरस्वती। - फोटो : BIJNOR
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प्राचीन स्थल को बचाने में लगी हैं नागा साध्वी
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बिजनौर। गजरौला शिव और स्वाहेडी मार्ग पर प्राचीन माल देवता मंदिर स्थल पर की जमीन पर अवैध कब्जा हो रहा है। प्राचीन पेड़ों को कटवाने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन नागा साध्वी की सक्रियता ऐसे लोगों की कोशिश नाकाम कर रही है। नागा साध्वी ने यहां गोशाला शुरू कर दी है, तो मंदिर की देखरेख भी हो रही है। बावजूद बहुत सी दरकार हैं, जो इस प्राचीन स्थल के लिए जरूरी हैं।
गजरौला शिव और स्वाहेड़ी मार्ग पर प्राचीन स्थल माल देवता मंदिर है। यहां तीन वृक्ष काफी प्राचीन हैं। इस स्थल की भूमि तो करीब 25 बीघा है, किंतु अब 12 बीघे के आसपास बची है। यहां आसपास में प्राचीन प्रतिमाएं, शिलाएं और शिलालेख मिलते रहे हैं। लगता है कि यहां प्राचीन काल में कोई नगर रहा होगा। यहां से निकली मूर्ति और शिलालेख आदि जिसे जो मिला लेकर चलता बना। स्वाहेड़ी के जयनारायण सिंह और अन्य बताते हैं कि 1985 के आसपास उनके गांव में भाकियू के संस्थापक अध्यक्ष स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत का कार्यक्रम था। उसमें उत्तराखंड से एक संन्यासी भी आए थे, जो यहां से काफी प्रतिमा और शिलालेख आदि ले गए। कहकर गए थे कि इनकी जांच कराएंगे, लेकिन बाद में उनका क्या हुआ, कुछ नहीं पता चला।
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उधर, आठ साल पूर्व ही जूना अखाड़े की साध्वी महंत गंगानंद सरस्वती को इस स्थल का पता चला। एतिहासिक महत्व के स्थल को बचाने के लिए उन्होंने यहां रहने और गोशाला खोलने का निर्णय लिया। आज वह इस संपत्ति की रक्षा करने में लगी हैं। गोशाला चला रही हैं। जूना अखाड़ा भी इस कार्य में उनकी मदद करता है।
विधायक सुचि चौधरी और उनके पति ने कराया निर्माण
भाजपा विधायक सुचि चौधरी और उनके पति मौसम चौधरी ने यहां 48 मीटर का आरसीसी का फर्श बनवाया। पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह ने भी अपने कार्यकाल में यहां सोलर लाइट लगवाई।
जिंघाला जाटों के बच्चों का होता है मुंडन संस्कार
इस स्थान पर एक चबूतरा बना है। चबूतरे पर जिंघाला जाटों के परिवार के लोग अपने बच्चों का मुंडन संस्कार कराते हैं। जिंघाला जाट परिवार दुनिया में कहीं भी बसे हों, किंतु वह इसी स्थल पर आकर मुंडन संस्कार कराना पसंद करते हैं। आसपास के खेत से मिलने वाली प्रतिमाएं यहां पर ही रख दी जाती हैं। एक बरामद शिला और सिर का भाग यहां चबूतरे में लगा भी है।
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संपर्क मार्ग और शौचालय बनने की दरकार
साध्वी गंगानंद सरस्वती कहती हैं कि मुंडन संस्कार के लिए जिंघाला परिवार आते हैं। उनके साथ उनके रिश्तेदार भी काफी होते हैं। परिसर में शौचालय नहीं है, जिस कारण लोगों को खुले में शोच के लिए जाना पड़ता है। यहां महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग - अलग शौचालय बनने चाहिए। आने वालों के लिए एक सामुदायिक केंद्र भी होना चाहिए। मुख्य मार्ग से इस स्थान तक रास्ता कच्चा और रेतीला है। मार्ग पक्का बन जाए, तो आने जाने वालों को सुविधा होगी।

बिजनौर के ग्राम गजरौला शिव और स्वाहेड़ी मार्ग पर प्राचीन स्थल माल देवता मंदिर का प्राचीन शिवलिं?- फोटो : BIJNOR

बिजनौर के ग्राम गजरौला शिव और स्वाहेड़ी मार्ग पर प्राचीन स्थल माल देवता मंदिर पर प्राचीन वृक्ष।- फोटो : BIJNOR

बिजनौर के ग्राम गजरौला शिव और स्वाहेड़ी मार्ग पर प्राचीन स्थल माल देवता मंदिर पर प्राचीन प्रतिम?- फोटो : BIJNOR

बिजनौर के ग्राम गजरौला शिव और स्वाहेड़ी मार्ग पर प्राचीन स्थल माल देवता मंदिर पर प्राचीन प्रतिम?- फोटो : BIJNOR

बिजनौर के ग्राम गजरौला शिव और स्वाहेड़ी मार्ग पर प्राचीन माल देवता मंदिर का वह स्थान जहां जिंघाल?- फोटो : BIJNOR

बिजनौर के ग्राम गजरौला शिव और स्वाहेड़ी मार्ग पर प्राचीन माल देवता मंदिर।- फोटो : BIJNOR

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