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मेरी मां तो चली गईं... मगर शवों की दुर्गति न करो

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मेरी मां तो चली गईं... मगर शवों की दुर्गति न करो
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मेरठ। मेरी मां तो इस दुनिया से चली गईं। लेकिन मेरी स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से दरखास्त है कि शवों की दुर्गति न करें। मेरी मां का अंतिम संस्कार तीसरे दिन हो सका है। यह कहना है रशीद नगर के रहने वाले जीशान फातिमा के बेटे का।
उन्होंने बताया कि उनकी मां जीशान फातिमा (52) की मौत शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे हो गई थी। रात में ही उनकी कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। शनिवार को दिन भर मां का शव उन्हें नहीं मिल सका। वह एक से दूसरी जगह भटकता रहा। रविवार दोपहर करीब एक बजे शव सुपुर्द किया गया और करीब 1:30 बजे खत्ता रोड पर उनको दफनाया। उसकी मां का शव ढाई दिन तक मोर्चरी में ही रखा हुआ था। अब उनके सैंपल लिए गए हैं। उनकी जांच कराई जाएगी। वह छह बहनों के इकलौते भाई हैं। दरअसल, कोरोना से मरने वाले लोगों की अंतिम संस्कार को लेकर इस कदर पेचीदगी हैं कि उन्हें बयान करना मुश्किल है।
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क्वारंटीन सेंटर से आए बेटे ने किया अंतिम संस्कार
मेरठ। कोरोना पॉजिटिव आए मुसद्दीलाल (68) के परिवार वाले भी उनका शव लेने के लिए घंटों तक रविवार को मेडिकल कॉलेज में भटकते रहे। वह सुबह करीब नौ बजे अस्पताल पहुंचे थे और उनको दोपहर करीब दो बजे शव सुपुर्द किया गया। इसके बाद सूरजकुंड श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार हुआ। स्वास्थ्य विभाग से दरख्वास्त करने पर क्वारंटीन में रह रहे उनके इकलौते बेटे को कुछ देर के लिए सूरजकुंड श्मशान घाट पर लाया गया, जहां उसने अंतिम संस्कार किया। साथ ही अंतिम संस्कार करने वाले युवक को पीपीई किट उपलब्ध कराई गयी। इसके बाद वापस उसे घाट परतापुर स्थित क्वारंटीन सेंटर भेज दिया गया। अभी उसकी जांच रिपोर्ट आनी बाकी है। मुसद्दीलाल की शनिवार रात मौत हो गई थी। परिवार वालों ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था।
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