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कवाल कांड से बदल गई थी लोकसभा चुनाव की तस्वीर, बसपा का हो गया था ये हाल

Thu, 07 Feb 2019 05:06 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मुजफ्फरनगर कवाल कांड फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे की नींव कवाल कांड ने देश में राजनीति की दशा और दिशा को बदलकर रख दिया था। न केवल पश्चिमी यूपी, बल्कि देश की सियासत पर दंगे का व्यापक असर दिखा था। भाजपा ने लोकसभा चुनाव में एकतरफा जीत हासिल की थी, तो सपा को हाशिए पर ला दिया था। बसपा और रालोद एक एक सीट के लिए तरस गए। दंगे का असर 2017 के विधानसभा चुनाव में भी दिखा और इनमें भी भाजपा का ग्राफ हाई रहा।  

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27 अगस्त 2013 को जानसठ कोतवाली के गांव कवाल में साइकिल और बाइक टकराने को लेकर झगड़ा हुआ था। शाहनवाज की मौत के बाद ममेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड को सांप्रदायिक रूप दिया गया और पंचायतों का दौर शुरू हो गया। कई दिनों तक ज्ञापन और पंचायतों के बाद सात सितंबर को नंगला मंदौड़ की महापंचायत के बाद जिले में दंगा भड़क उठा था। दंगे को लेकर तत्कालीन सपा सरकार और भाजपा के बीच खींचतान मची थी। सरकार और उसके मंत्रियों पर एक पक्ष का तुष्टिकरण और हत्याकांड के आरोपियों को छुड़ाने के आरोप लगे। राजनैतिक दलों ने एक-दूसरे को हिंसा का जिम्मेदार ठहराया। हिंदुत्व का झंडा उठाए भाजपा के पक्ष में पूरा हिंदू समाज एकजुट हो गया। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को इसका लाभ मिला।

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मुजफ्फरनगर में भाजपा प्रत्याशी डॉ. संजीव बालियान ने करीब चार लाख वोटों से बसपा के कादिर राना को हराकर एकतरफा जीत हासिल की। मुजफ्फरनगर से उठे भाजपा की जीत के तूफान में अन्य राजनैतिक दल सूखे पत्तों की मानिंद उड़ गए। हिंदुओं के धु्व्रीकरण के सामने प्रदेश की सत्ता पर पूर्ण बहुमत से काबिज समाजवादी पार्टी पिछड़ गई। बसपा का दलित-मुस्लिम गठजोड़ भी किसी काम नहीं आया। उसे प्रदेश में एक भी सीट नहीं मिली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से रालोद का भी जनाधार खिसक गया। रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी सद्भावना मुहिम का असर नजर नहीं आया। उन पर दंगे में जनता के बीच नहीं आने के आरोप लगे। पूरा हिंदू समाज भाजपा के पक्ष में एकजुट हो गया। 2017 के विधान सभा चुनाव में भी दंगे के जख्म हरे रहे। सियासी तीरों से इन्हें और कुरेदा गया। हिंदुत्व के दम पर विजय रथ पर सवार भाजपा ने विधान सभा चुनाव के पहले चरण से ही शानदार माहौल बनाया। यहां से शुरू हुई जीत पूरे प्रदेश में पूर्ण बहुमत के रूप में सामने आई।

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