फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कवाल कांड: डीएम-एसएसपी के तबादले से बिगड़ा था माहौल, लोगों के आक्रोश को भांप नहीं पाई थी सरकार 

Thu, 07 Feb 2019 04:06 PM IST
Dimple Sirohi रणवीर सैनी, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
विज्ञापन
kawal case
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर के कवाल गांव में सरेआम सड़क पर सचिन और गौरव की हत्या के बाद पनपे आक्रोश को देखते हुए तत्कालीन डीएम सुरेंद्र सिंह और एसएसपी मंजिल सैनी ने आरोपियों की गिरफ्तारी को अभियान चलाया था। तत्कालीन सरकार के कुछ नेताओं ने लखनऊ में दबाव बनाकर दोनो अफसरों का तबादला करा दिया। इससे एक वर्ग विशेष में यह संदेश गया कि सरकार आरोपियों को बचाने का काम कर रही है, जिसका पूरे जिले में रिएक्शन हुआ। माना गया था कि यदि दोनों अफसरों का तबादला न होता तो दंगे के हालात नहीं बनते।  
विज्ञापन


27 अगस्त 2013 से पहले किसी ने सोचा भी नहीं था कि मुजफ्फरनगर में दंगा हो सकता है। तत्कालीन सपा सरकार की अदूरदर्शिता और जिले के एक वर्ग के सत्ता में हस्तक्षेप रखने वाले नेताओं की जल्दबाजी ने ये हालात पैदा किए। कवाल में घटना के बाद तत्कालीन डीएम सुरेंद्र सिंह और एसएसपी मंजिल सैनी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को कंट्रोल कर लिया था। 

पुलिस ने कवाल गांव को घेरकर आरोपियों के घरों में छापामारी और धरपकड़ शुरू कर दी थी। सत्ता में हस्तक्षेप रखने वाले जिले के कुछ सपा नेताओं ने लखनऊ में माहौल बनाया कि दोनों अधिकारी एक वर्ग विशेष का उत्पीड़न कर रहे हैं। शासन ने भी अदूरदर्शिता का परिचय देते हुए दोनों अफसरों का उसी दिन तबादला कर दिया। इसका पूरे जिले में इतना रिएक्शन हुआ कि एक वर्ग में आक्रोश पनप गया, उसका पुलिस और सरकार दोनों से विश्वास उठ गया। 

यह अफवाह फैल गई कि सत्ताधारी नेताओं ने थाने में पहुंचकर सभी आरोपियों को छुड़ा दिया। यह आक्रोश पंचायत के रूप में फूटा और हालात इतने खराब हुए कि सरकार और प्रशासन सब फेल हो गए। जिले में दंगे में 65 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। यदि डीएम और एसएसपी का तबादला न होता तो हो सकता था जिले में दंगा न होता।  
विज्ञापन

दोनों अफसरों ने जीता था जनता का विश्वास 
कवाल कांड से कुछ दिन पहले ही ईद के दिन तावली गांव में एक व्यक्ति की मस्जिद के गेट पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के दस मिनट के अंदर ही मौके पर पहुंचकर डीएम सुरेंद्र सिंह और एसएसपी मंजिल सैनी ने स्थिति को कंट्रोल किया। आरोपी को गिरफ्तार किया और लोगों को शांत किया। 

आक्रोशित जनता को शांत करने में कई मुस्लिम नेताओं का भी सहयोग लिया। एक मायने में यह घटना कवाल की घटना से भी बड़ी थी, लेकिन अफसरों की सूझबूझ से काबू पा लिया गया। इन दोनो अफसरों ने अपने कार्यकाल में हालात को कभी भी बेकाबू नहीं होने दिया। इनके तबादले के बाद आए अफसर स्थिति को भांप ही नहीं सका।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें