खत्म कर दिए गए हैं संगठित अपराध
डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि सूबे से संगठित अपराध पूरी तरह से खत्म कर दिए गए हैं। वहीं, गली की गुंडागर्दी को भी अफसरों ने खत्म कर दिया है। यदि ऐसी कोई घटना होती भी है तो बमुश्किल 12 से 24 घंटे के भीतर उसे वर्कआउट कर दिया जाता है।
महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा पर भी हो रहा काम
डीजीपी ने कहा कि सूबे में महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा के लिए भी हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। यह देखना शानदार है कि अब राजधानी लखनऊ में देर रात तक न केवल महिलाएं काम कर रहीं हैं, वहीं रात में शॉपिंग भी कर रहीं हैं। वहीं, रेलवे पुलिस के साथ मिलकर लावारिस मिलने वाले बच्चों को भी उनके घरों तक पहुंचाया जा रहा है।
नेतृत्व क्षमता में गुणात्मक सुधार का प्रयास
डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि पिछले डेढ़ साल के भीतर पुलिस में गुणात्मक सुधार के प्रयास किए गए हैं। इसके लिए पुलिसिंग में टेक्नालॉजी, मैनेजमेंट व प्रोफेशनल एचीवमेंट पर ध्यान दिया जा रहा है। वहीं, थाना, सीओ सर्किल, जिला स्तर, रेंज व जोनल स्तर और डीजीपी स्तर पर भी नेतृत्व क्षमता में सुधार के हरसंभव प्रास किए जा रहे हैं।
डीजीपी ने किया नवनिर्मित अपराध शाखा भवन का लोकार्पण
पुलिस महानिदेशक ओमप्रकाश सिंह ने बुधवार को अपराध शाखा के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया। डीजीपी ओपी सिंह बुधवार सुबह 10.30 बजे अपराध शाखा के नए भवन का लोकार्पण करने पहुंचे। यहां सबसे पहले उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, इस दौरान पीएसी छठीं वाहिनी के बैंड ने राष्ट्रगान के बाद जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़ियां करती हैं बसेरा और ओम जय जगदीश हरे की धुन बजाकर डीजीपी का स्वागत किया। लोकार्पण के बाद डीजीपी ने नए भवन के हॉल में ही अफसरों की परिचयात्मक बैठक भी ली।
बुके लेकर पहुंचे छात्रों को बैरंग लौटाया
अपराध शाखा के नए भवन के लोकार्पण के समय जानसठ रोड के संगम विहार स्थित एसबीएस इंटर कॉलेज के दो छात्र अमन व सादिक बुके लेकर वहां पहुंचे, जिन्होंने पूछताछ में कॉलेज की उप प्रधानाचार्या सुनीता सिंह द्वारा डीजीपी के लिए बुके भेजने की जानकारी दी। वहां मौजूद अफसरों ने दोनों छात्रों को इसकी परमीशन नहीं देते हुए बुके की जांच कर उन्हें बैरंग लौटा दिया।
कलावा तो बंधवाया, तिलक नहीं लगवाया
अपराध शाखा के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण के पंडित उमाशंकर शास्त्री, पंडित महेश्वर प्रसाद शास्त्री, पंडित राजधर शास्त्री व प्रफुल्ल पांडेय ने पूजा-अर्चना के दौरान डीजीपी कलाई पर कलावा बांधा। इसके बाद जैसे ही पंड़ित जी ने डीजीपी को माथे पर तिलक लगाना चाहा, उन्होंने रोकते हुए तिलक लगवाने से इंकार कर दिया। इससे लेकर चर्चाएं भी हुई। लेकिन अफसरों ने इस पर कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।
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