मुजफ्फरनगर में मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म का प्रयास कर उसकी हत्या करने वाले अभियुक्त को पॉक्सो अदालत ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसमें 25 हजार रुपये मृतका के पिता को दिए जाने के आदेश दिए हैं।
शहर कोतवाली क्षेत्र के एक मोहल्ला निवासी पीड़ित पिता ने 15 जुलाई 2016 को शहर कोतवाली पर यह मुकदमा दर्ज कराया था। बताया था कि वह मजदूर है और जुमे की नमाज के बाद जब वह घर पहुंचा तो अपनी सात वर्ष की बच्ची को मौजूद न पाकर अपनी पत्नी से पूछा। पत्नी ने जवाब दिया कि उसे पड़ोसी तंजीम टॉफी दिलाने ले गया है। जब काफी देर तक बेटी वापस नहीं आई तो उसकी तलाश की गई। जब वह घर से बाहर निकले तो घर के पीछे ए टू जेड के प्लाट में बेटी के रोने की आवाज सुनाई दी। हम लोग वहां उसके पास पहुंचे तो वह रो रही थी। हमें देख आरोपी फरार हो गया। बच्ची के सिर पर भी गंभीर चोट थी। उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया गया था।
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वहीं बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया, मगर उसकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे इलाज के लिए हायर सेंटर में रैफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार तिवारी की अदालत पॉक्सो एक्ट कोर्ट में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो दिनेश कुमार शर्मा व प्राईवेट कौंसिल शैलेंद्र राणा ने कोर्ट में 11 गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए अभियुक्त तंजीम को दुष्कर्म के प्रयास और हत्या करने का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा और 30 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। कोर्ट में जुर्माना की राशि में से 25 हजार रुपये मृतका के पिता को दिए जाने के आदेश दिए हैं।
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