यह था मामला
कवाल कांड के बाद 29 अगस्त 2013 को कवाल गांव में दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए थे। हिंसा और आगजनी की घटना के बाद पुलिस ने तब पूर्व प्रधान के पति विक्रम सैनी समेत 28 लोगों के खिलाफ सिखेड़ा थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
प्रकरण की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट में हुई। विधायक समेत 12 आरोपियों को धमकी देने के मामले में दो साल की सजा और पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। धारा 148 में दो साल की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया था।
इसलिए तूल पकड़ रहा मामला
सपा नेता पूर्व मंत्री आजम खान को सजा सुनाए जाने के बाद विधानसभा की सदस्यता चले जाने के मामले के बाद विक्रम सैनी का प्रकरण भी तूल पकड़ा रहा है। विपक्ष के नेता सवाल उठा रहे हैं। रालोद अध्यक्ष जयंत सिंह ने भी इस बाबत पत्र लिखा है। जबकि विक्रम सैनी का कहना है कि रालोद अध्यक्ष को नियमों की जानकारी ही नहीं है।