कैराना सांसद हुकुम सिंह द्वारा कैराना से पलायन के मामले पर मचे घमासान के बाद मानवाधिकार आयोग ने जांच की थी। इस आयोग की जांच रिपोर्ट में 346 पीड़ित परिवारों की सूची जारी हुई थी। जिसके आधार पर मेरठ के आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। जिसमें मुजफ्फरनगर और मेरठ से भी पलायन होने की बात कही थी।
लोकेश खुराना ने याचिका में पुराने मेरठ शहर के कई मोहल्लों की सूची प्रस्तुत की थी। जिसमें कहा गया था कि कभी यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों रहते थे, लेकिन धीरे-धीरे कानून-व्यवस्था का इतनी खराब हुई कि लोग पलायन करने को मजबूर हुए। लोगों ने अपने मकान बहुत सस्ते दामों पर बेच दिए और बाहरी सुरक्षित कालोनियों में रहने को मजबूर हो गये।
इस याचिका को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव के साथ ही प्रमुख सचिव प्रदेश शासन और मेरठ, मुजफ्फरनगर के साथ शामली से भी दो फरवरी तक जवाब मांगा था। लेकिन शासन और प्रशासन स्तर से जवाब देने के लिए समय मांगा गया है। वहीं इसी बीच चुनाव को देखते हुए हाईकोर्ट ने कैराना से पलायन कर गये लोगों को कड़ी सुरक्षा में मतदान कराने का निर्देश शासन को दिया है।