आगरा की सेंट्रल जेल में हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काटने वाले पूर्व प्रधानाध्यापक मरगूब अहमद 13 साल बाद रिहा होकर अपने परिवार में आ गए हैं। राज्यपाल रामनाईक के आदेश पर मरगूब अहमद को जेल से मंगलवार को रिहा कर दिया गया। मरगूब अहमद की रिहाई से परिवार में खुशी का माहौल है। मामला यूपी के मुजफ्फरनगर का है।
जामे उल उलूम जूनियर हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर मरगूब अहमद रहे। प्रधानाध्यापक स्कूल में ही परिवार सहित रहते हैं। इनका स्कूल की प्रबंधक कमेटी को लेकर रंजिश चली आ रही थी। वर्ष 2002 में 17 दिसंबर को गांव खेड़ीकुरैश निवासी स्कूल के प्रबंधक हामिद मुख्तार व उसके छोटे भाई साजिद मुख्तार की स्कूटर पर खतौली आते समय गोली मारकर हत्या कर दी थी। दोहरे हत्याकांड में मृतकों के परिजनों ने तत्कालीन प्रधानाध्यापक मरगूब अहमद सहित इनके परिवार के ही छह लोगों को नामजद कराया था। पुलिस ने नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। दो वर्ष बाद डबल मर्डर के हत्यारोपी मरगूब अहमद व उनके परिवार के लोग जमानत पर रिहा हो गए थे। वर्ष 2005 में 20 दिसंबर को दोनों मृतकों के तीसरे भाई अहमद मुख्तार की रोडवेज बस स्टैंड के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मृतकों के परिजनों ने फिर से पूर्व प्रधानाध्यापक मरगूब सहित परिवार के छह लोगों को नामजद कराया था। पुलिस ने तीसरे मर्डर में भी नामजद आरोपियों को जेल भेज दिया था। जिला सत्र न्यायालय मुजफ्फरनगर में चली हत्याकांड की सुनवाई के बाद मरगूब अहमद और उनके परिवार के लोगों को उम्र कैद की सजा हो गई थी। आरोपी पक्ष के हाईकोर्ट में अपील करने पर सजा बरकरार रखी थी।