रुड़की रोड पर हंगामा के बाद नाले की खुदाई का कार्य शुरू हुआ।
मोदीपुरम। कृषि विश्वविद्यालय में शुक्रवार को सात दिवसीय मशरूम बीज एवं उत्पादन प्रशिक्षण का समापन हुआ। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि मशरूम अब केवल एक सब्जी नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत साधन बनता जा रहा है।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. आई.एस. सेंगर, निदेशक ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ने बताया कि विश्वविद्यालय बायो फोर्टीफाइड मशरूम तैयार करने में तेजी से काम कर रहा है। इसमें प्राकृतिक रूप से जिंक, मैग्नीशियम और पोटेशियम की मात्रा अधिक होगी, जिससे पोषणयुक्त मशरूम आसानी से उपलब्ध होंगे। निदेशक शोध ने मशरूम बीज उत्पादन को लाभकारी व्यवसाय बताते हुए कहा कि थोड़ी तकनीकी समझ और वैज्ञानिक विधि अपनाकर किसान स्वयं बीज उत्पादन शुरू कर सकते हैं। उन्होंने बीज उत्पादन की आधुनिक तकनीक पर विस्तार से चर्चा की। मुख्य अतिथि डॉ. आरके सिंह, आलू अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम, ने कहा कि देश में मशरूम की मांग लगातार बढ़ रही है और पोषणयुक्त फूड की ओर उपभोक्ता तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि कम लागत और कम जगह में भी उत्पादन संभव है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।
विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को आधुनिक प्रजातियों, तापमान नियंत्रण, बीज निर्माण, पैकेजिंग और मार्केटिंग के संबंध में प्रशिक्षण दिया। समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए।