- घेर में छिपाकर रखे थे जेवर और खून से सने कपड़े, वृद्धा ने किया था संघर्ष
- वारदात कर नहाकर घेर में आकर सो गया, सुबह की खुलासे की मांग
माई सिटी रिपोर्टर
परीक्षितगढ़ (मेरठ)। रामनगर गांव में फूल समुंदरी की हत्या करने वाले लीलू सिंह को लग रहा था कि उसे पुलिस पकड़ नहीं पाएगी इसलिए वह कहीं भागा नहीं। लेकिन संघर्ष के दौरान फूल समुंदरी के हाथों पर मिले सफेद बालों ने लीलू सिंह की पोल खोल दी। पुलिस पड़ताल में यह पहला अहम सुराग मिला। इसी से पुलिस को उस पर संदेह हुआ।
जांच अधिकारी थानाध्यक्ष सुदीश सिंह ने बताया कि पुलिस ने घटनास्थल के आसपास और गांव में लगे 25 सीसीटीवी कैमरों की रात की फुटेज खंगाली लेकिन उनमें न तो कोई गांव में आता दिखा न जाता हुआ। गांव के जो लोग घटनास्थल पर मौजूद थे उनमें लीलू सिंह के ही सिर, हाथ और दाढ़ी के बाल सफेद थे। इसी तरह के बाल समुंदरी के हाथों और शरीर के कई अन्य हिस्सों पर मिले थे। पुलिस के इस शक को मृतका के बेटों और बेटी के संदेह से भी बल मिला। उन्होंने भी लीलू पर ही शक जाहिर किया था क्योंकि करीब पांच साल पहले उसने इनके घर में चोरी की कोशिश की थी। हालांकि पड़ोसी होने के कारण तब रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई थी।
पुलिस ने लीलू को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो वह टूट गया और उसने पुलिस के सामने वारदात करना कुबूल कर लिया। जांच अधिकारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या के अलावा और किसी अन्य अपराध की पुष्टि नहीं हुई है। वृद्धा ने लीलू के साथ संघर्ष किया था। इस दौरान उनके कपड़े भी फट गए। लीलू उन कपड़ों को भी अपने साथ ले गया ताकि केस हत्या, लूट के अलावा और किसी अन्य वारदात की तरफ भी मोड़ा जा सके।
घेर में भुस में दबाए जेवर, कपड़े, नहाकर सो गया
सीओ सदर देहात सुधीर सिंह ने बताया कि पुलिस पूछताछ में लीलू ने बताया कि फूल समुंदरी की हत्या और लूट करने के बाद वह बराबर में ही अपने घेर में पहुंचा। उसने लूटे गए जेवर, खून से सने समुंदरी के कपड़े और मोबाइल भूसे में छिपा दिए। नहाया और सो गया। सुबह उठा जब लोगों की भीड़ जमा हो गई तो समुंदरी के घर पहुंचा और भीड़ में शामिल होकर खुलासे की मांग करने लगा। लीलू सिंह शादी-शुदा है, उसके दो बच्चे हैं। इस घटना के खुलासे में पांच टीमें लगाई गई थीं।
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भतीजी की शादी में जाना था
मृतका फूल समुंदरी को बुधवार शाम गांव खटकी में भतीजी की शादी में जाना था। वह खुशी-खुशी शादी की तैयारी में लगी हुई थी। लेकिन विधाता को कुछ और ही मंजूर था। जिस परिवार में शादी को लेकर खुशी का माहौल बना हुआ था। इस घटना से खुशी गम में तब्दील हो गई।