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मुन्नाभाई गैंग का भंडाफोड़ : तीन लाख रुपये में लेते थे कैटेट में दाखिला दिलाने का ठेका

Thu, 18 May 2017 12:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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तीन लाख रुपये में लेते थे पास कराने का ठेका
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मेरठ में यूपी कैटेट 2017 में एडमिशन के लिए खेल किया गया। मुन्नाभाई गैंग ने सेटिंग से फॉर्म भर परीक्षार्थियों को पास कराने का ठेका लिया। तीन लाख रुपये में मेरिट में नाम शामिल कराने की गारंटी दी जाती थी। गैंग कई जनपदों में सक्रिय है। पहले दिन एसटीएफ ने बांदा के एक केंद्र से दस फर्जी छात्रों को पकड़ा था। 
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कंबाइंड एग्रीकल्चर टेक्नालॉजी टेस्ट इस बार सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि करा रहा है। परीक्षा के लिए यूपी में 24 सेंटर बनाए गए हैं। मंगलवार को पहले दिन यूजी के सभी पाठ्यक्रमों की परीक्षा थी। परीक्षा के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, लेकिन फिर भी बांदा के एक सेंटर पर एसटीएफ ने छापा मारकर दस परीक्षार्थियों को किसी और की जगह पर परीक्षा देते हुए पकड़ लिया था। 

यह गैंग परीक्षा के फॉर्मों की बिक्री के समय ही सक्रिय हो जाता है। अलग अलग जनपदों में अपने नेटवर्क को फैलाकर परीक्षा उत्तीर्ण कराता है। कृषि विश्वविद्यालय के विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि इस गैंग ने करीब सौ से अधिक छात्रों को परीक्षा में पास कराने की जिम्मेदारी ली थी।
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एसटीएफ को पहले मिली थी जानकारी

एसटीएफ ने दस फर्जी छात्रों को पकड़ा था
परीक्षा को लेकर एसटीएफ को पहले से ही जानकारी थी। एक अधिकारी ने बताया कि एसटीएफ फॉर्म भरने के दौरान से सक्रिय थी। एक सिपाही ने कानपुर के कुछ छात्रों से दोस्ती की थी, वह फार्म भरने और परीक्षा कराने तक पूरी नजर रखे हुए था। 

कुलपति डॉ. गया प्रसाद ने बताया कि फर्जी तरह से परीक्षा देने का मामला कोचिंग सेंटर से जुड़ा होता है। बांदा में पकड़े गए परीक्षार्थियों की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। इस संबंध में वहां के रजिस्ट्रार से रिपोर्ट मंगाई गई है। शीघ्र ही पूरे मामले की रिपोर्ट भेजी जाएगी।   

यहां सक्रिय रहा गैंग
कानपुर, फैजाबाद, बांदा, इलाहाबाद, वाराणसी, लखीमपुर, सीतापुर, गोंडा, मऊ बहराइच आदि में यह गैंग सक्रिय है। दो साल पहले पकड़े गए मुन्ना भाइयों के तार भी कानपुर, फैजाबाद, बांदा, मेरठ से जुड़े हुए थे। वह कोचिंग सेंटर के माध्यम से छात्रों को अपने चंगुल में फंसाते थे। 

विवि प्रशासन की टीम पर सवाल 
सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि ने परीक्षा के लिए टीम तो बना रखी है, लेकिन वह फर्जी छात्रों को पकड़ नहीं पाई। सवाल उठता है कि यदि एसटीएफ छात्रों को न पकड़ती तो क्या होता। गैंग अपनी मंशा में कामयाब हो जाता।
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