इससे पहले रुड़की जेल में भी राठी अपने कारनामों के लिए चर्चित रह चुका था। जेलर के कमरे से सोशल मीडिया पर सक्रिय रहा। इस बीच जेल में बंद कई दूसरी बंदियों को दूसरी जेलों में शिफ्ट किया।
जेल प्रशासन ने सुनील राठी की इस गतिविधि के बारे में अधिकारियों को अवगत भी कराया। लगभग 10 बार राठी को दूसरी जेल में शिफ्ट करने के लिए चिट्ठियां भी लिखी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अब बड़ा सवाल उठता है कि आखिर किसके दबाव में सुनील राठी को जेल से शिफ्ट नहीं किया जा रहा था। यदि राठी को पहले ही जेल से शिफ्ट कर दिया जाता तो डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या नहीं होती।
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