मेरठ। नगर निगम ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 में रैंक सुधारने की कवायद शुरू कर दी है। तीसरी तिमाही के दो महीने शेष रहने पर नगर आयुक्त ने महानगर को नौ भागों में बांटकर इनकी जिम्मेदारी सफाई निरीक्षकों को सौंप दी है। हालांकि निगम के सामने शत-प्रतिशत डोर टू डोर कूड़ा उठाने, गीला और सूखा कूड़ा अलग-अलग करने तथा इसके निस्तारण की चुनौती बरकरार है।
खतरनाक कचरा निपटान जरूरी
फीडबैक के आधार पर सालभर चलने वाली छह हजार अंकों की परीक्षा में ज्यादा अंक लाने वाला नगर निगम ही स्वच्छता का सिरमौर बनेगा। इस बार आम लोगों के फीडबैक को अहम माना जाएगा। बगीचा, दुकानदार, होटल, गेस्ट हाउस, धर्मशाला, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट, रेस्टोरेंट, सरकारी और प्राइवेट आफिस के अतिरिक्त व्यापारी संगठनों एवं एनजीओ का फीडबैक लिया जाना है। घरेलू खतरनाक कचरे के रूप में सेनेटरी नेपकिंस, डायपर्स और अन्य मेडिकल वेस्ट गाड़ियों के पीछे की तरफ काले डिब्बे में एकत्रित करना है। हालांकि नगर निगम ऐसा नहीं कर रहा है।
शपथ दिलाने के बाद बनाई रणनीति
पांच दिन पहले स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छा प्रदर्शन करने की निगम कर्मियों को शपथ दिलाने के बाद नगर आयुक्त डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया ने रविवार को शहर को नौ भागों में बांटकर सफाई निरीक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी है। सफाई निरीक्षकों को शहर को कचरा मुक्त बनाने के अतिरिक्त सिटीजन फीडबैक के लिए अभियान चलाकर निर्धारित किए अंकों को ज्यादा से ज्यादा हासिल करने के लिए कहा है। अभियान की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सहायक नगर आयुक्त प्रथम ब्रजपाल सिंह ने शुरू कर दी है।
ये है मुख्य चुनौती
गीला, सूखा व खतरनाक कचरा अलग-अलग एकत्रित करना
गीले व सूखे कचरे का शत-प्रतिशत निस्तारण
कचरा सड़क पर फेंकने और जलाने वालों पर कार्रवाई और जुर्माना लगाना
निर्माण मलबा और विध्वंस अपशिष्ट का निस्तारण
शहर की सफाई शत-प्र्रतिशत करना