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मम्मी-पापा! मैं लड़की हूं... क्या यही मेरा कुसूर, मुझे इसी लिए छोड़ा

Sat, 28 Jul 2018 10:19 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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नवजात बच्ची - फोटो : अमर उजाला
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मेडिकल अस्पताल में करीब डेढ़ माह की एक बच्ची लावारिस हालत में मिली। उसके परिजनों को तलाशने की कोशिश की गई। लेकिन वह नहीं मिले। बच्ची को फिलहाल नर्सरी में रखा गया है। उसके खून में इंफेक्शन है। वह अगर सोचने-समझने लायक होती तो शायद यही कहती कि ‘मम्मी-पापा! मैं लड़की हूं... क्या यही मेरा कुसूर है। मुझे इसी लिए छोड़ा गया। अगर मैं बेटा होती तो भी क्या छोड़ दिया जाता।’

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ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है कि क्योंकि ज्यादातर बेटियां ही इस तरह छोड़ी जा रही हैं, बेटे नहीं। मेडिकल अस्पताल के सीएमएस डॉ. अजीत चौधरी ने बताया कि सुबह करीब 11 बजे बच्ची गायनिक वार्ड के पास खाली जगह में मिली। उसके हाथ में दूध की बोतल थी। उसके रोने की आवाज सुनकर वहां मौजूद मरीजों के तीमारदारों का ध्यान उस तरफ गया। उन्होंने पहले उसके परिजनों को आवाज लगाई। कोई जवाब न मिलने पर मेडिकल के अधिकारियों को सूचना दी। जिस पर सीएमएस और आशा ज्योति केंद्र की पदाधिकारी पहुंचीं। उन्होंने बच्ची की तबियत खराब देखकर उसे नर्सरी में भर्ती कराया। सीएमएस ने बताया कि ऐसा लग रहा है कि कोई परिवार का व्यक्ति ही बाहर से बच्ची को यहां छोड़ गया है। बच्ची के परिजनों के बारे में जानकारी करने की कोशिश की जा रही है। अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की भी फुटेज खंगाली जा रही है।

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बच्ची की हालत गंभीर 
मेडिकल के नवजात एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वी. जायसवाल ने बताया कि बच्ची की तबियत ठीक नहीं है। वह गंभीर है। उसके खून में इंफेक्शन काफी बढ़ गया है। इस तरह का इंफेक्शन गंदगी की वजह से पनप सकता है। उसे बेहतर से बेहतर इलाज देने की कोशिश की जा रही है।

पहले भी सामने आए ऐसे केस
- करीब दो माह पहले सहारनपुर जिले में दो दिन की बच्ची को एक महिला एक घर के बाहर छोड़कर चली गई थी। हालांकि घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी और पुलिस ने बाद में उस महिला को पकड़ लिया था।
- करीब एक सप्ताह पहले शामली में बस की सीट की नीचे 15 दिन की बच्ची को छोड़ दिया गया था। इस बच्ची के परिजन नहीं मिल सके हैं।
- मई माह में गंगानगर के एक अस्पताल में महिला की मौत के बाद परिजन नवजात को छोड़ गए थे। बाद में दबाव के बाद परिजन उसे ले गए थे।
- पिछले दिनों मेडिकल अस्पताल में भी एक नवजात गायब हो गई थी, जिसका अभी तक कोई सुराग नहीं लग सका है।
- इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं, शायद यही वजह की प्रदेश में ‘पालना’ व्यवस्था शुरू की गई है, जिसमें सरकारी अस्पतालों और सीएचसी पर पालना रखा गया है, ताकि लावारिस बच्चों को इधर-उधर फेंकने के बजाय वहां छोड़ा जा सके।
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चाइल्ड लाइन रखती है ख्याल
बाल कल्याण समिति की सदस्य व चाइल्ड लाइन की निदेशिका अनीता राणा का कहना है कि साल 2017-18 में पांच बच्चे मिले हैं। इनकी देखभाल समिति करती है। इनका पूरा ख्याल रखा जाता है। 

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