भैसाली मैदान में भक्ति और देशभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। भारत माता के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज गया। देशभक्ति के तरानों पर युवाओं का जोश देखते ही बन रहा था। जहां राष्ट्रगान को हर शख्स एक स्वर में गा रहा था, वहीं राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम की धुन पर सबके रोंगटे खड़े हो गए। भारत माता के वीर सपूतों को सच्ची श्रद्धांजलि दी गई। अमर उजाला और केएल इंटरनेशनल की प्रस्तुति मां तुझे प्रणाम के तहत रविवार को आयोजित सुमेरु संध्या में शहरवासियों में देशभक्ति का जज्बा भर गया। आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से पधारे ऋषि नित्य प्रज्ञा जी ने मन को शांत रखने और खुश रहने का मंत्र दिया।
कार्यक्रम में दीप प्रज्ज्वलन आईजी सुजीत पांडे, कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष बीना वाधवा, केएमसी के निदेशक डॉ. सुनील गुप्ता, एडको के डायरेक्टर अतुल गुप्ता, आर्ट ऑफ लिविंग के डॉ. शिवाकांत अग्रवाल, देवेंद्र मोहन, द अध्ययन स्कूल के डायरेक्टर प्रियांशु ने किया। गणेश वंदना मानस व टीम ने प्रस्तुत की। आर्ट ऑफ लिविंग के शिक्षक डॉ. शिवाकांत अग्रवाल ने चित्त की शांति के लिए भस्त्रिका का अभ्यास कराया। इस मौके पर डॉ. राजीव अग्रवाल, भाजपा नेता विनीत अग्रवाल शारदा, महानगर महामंत्री कमल दत्त शर्मा, डॉ. ललित भारद्वाज, आर्ट ऑफ लिविंग से मनीष श्रीवास्तव, निकुंज गर्ग, प्रदीप शाह, हरी, अंजू वारियर, नीता गुप्ता, डॉ. मीनाक्षी, डॉ. अनीता पुंडीर, आशीष बंसल, नूपुर व गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
गीतों में बही देशप्रेम और भक्ति की बयार
गायक, केमिकल इंजीनियर व आर्ट ऑफ लिविंग के शिक्षक ऋषि नित्य प्रज्ञा जी ने शानदार प्रस्तुति दीं। युवाओं की मांग पर डम डम डमरु बजावे रे हमारे जोगिया, शिव शिव शिवा हरी हर हरा, अच्युतम केशवम श्याम नारायणम्, नंद के आनंद भयो जय हो नंदलाल की, हरी सुंदर मंद मुकुंदा, गुरु चरणों में जीवन अर्पण आदि भजन सुनाए। युवाओं को जीवन दर्शन की शिक्षा देते हुए ऋषि नित्य प्रज्ञा ने गीत गोरी तेरा गांव बड़ा प्यारा, किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार, चंदन सा बदन गीत भी सुनाए। दर्शकों ने झूमते और नृत्य करते हुए सुमेरु संध्या का आनंद लिया। साज पर प्रवीन कुमार, अमित कुमार, सुधीर कुमार रहे।
‘अपने गुणों से करें दूसरे को प्रभावित’
भागदौड़ भरी जिंदगी में होड़ और ईर्ष्या से ग्रसित युवा पीढ़ी को जीवन दर्शन का संदेश देते हुए ऋषि नित्य प्रज्ञा ने कहा अपने गुणों को पहचानें, उनसे अपनी पहचान बनाएं। अपनी कमियों को देखकर दुखी न हों। जीवन में इतना व्यस्त न हों कि स्वयं को ही भूल जाएं। स्वयं के लिए वक्त निकालें। समाज और देश हमारे जीवन का अंग हैं, निजी जिंदगी के साथ देश सेवा और समाज सेवा में भी योगदान दें। अपनी सहजता न खोएं।
बसने कहा, मां तुझे प्रणाम
सुर, साधना और संगीत से सजी इस शाम में हर किसी ने मां तुझे प्रणाम का उद्घोष किया। ऋषि नित्य प्रज्ञा जी ने वंदे मातरम का नारा लगवाया तो श्रोताओं ने खड़े होकर भारत माता का अभिवादन किया। पूरा पंडाल मां तुझे प्रणाम और देशभक्ति के नारों से गूंजता रहा।
देशभक्ति की सराहनीय और अनूठी पहल : ऋषि नित्य प्रज्ञा
श्रीश्री रविशंकर जी के शिष्य ऋषि नित्य प्रज्ञा ने अमर उजाला मां तुझे प्रणाम के आयोजन की भूरि भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा युवाओं को देश सेवा से जोड़ने के लिए अमर उजाला की यह पहल अनूठी और सराहनीय है। जिन शहीदों को हम भूल रहे हैं, उन्हें मां तुझे प्रणाम जैसी पहल ने जीवंत कर दिया है।