मेरठ-हापुड़ लोकसभा सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने मंगलवार को लोकसभा में मेरठ के क्रिकेट खेल सामग्री निर्माण उद्योग को कश्मीर विलो लकड़ी उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि क्रिकेट के बल्ले बनाने के लिए पाकिस्तान को कश्मीरी विलो लकड़ी उपलब्ध है, लेकिन मेरठ को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लोकसभा में सांसद ने कहा कि मेरठ खेल सामग्री निर्माण में पूरे विश्व में सर्वोत्कृष्ट है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी अपनी ‘एक जिला एक उद्योग’ नीति के तहत मेरठ के विकास के लिए खेल उद्योग को चुना है। इसके बाद भी मेरठ के उद्यमी क्रिकेट बल्ले के लिए आवश्यक कश्मीरी विलो उपलब्ध न होने से परेशान हैं। इंग्लैंड से इंग्लिश विलो का आयात करना आसान है, लेकिन कश्मीर से कश्मीरी विलो मंगवाना आसान नहीं है। सांसद ने उद्यमियों की मांग के अनुसार कश्मीरी विलो उपलब्ध कराने की मांग की।
आसानी से नहीं मिल रही कश्मीरी विलो
एचआरएस स्पोर्ट्स के निदेशक वरुण मक्कड़ ने बताया पिछले चार-पांच सालों से कश्मीरी विलो लकड़ी आसानी से नहीं मिल पा रही है। कश्मीर के व्यापारियों की राजनीति के कारण ऐसा हो रहा है। वो खुद ही बैट बनाने की बात कर रहे हैं। कश्मीर विलो लकड़ी के बैट, इंग्लिश विलो की तुलना में सस्ते होते हैं। सांसद के इस मुद्दे को केंद्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू को गंभीरता से लेना चाहिये। मेरठ हर साल खेल निर्माण सामग्री से करीब एक हजार करोड़ रुपये का सामान निर्यात करता है। इससे सरकार को भी फायदा होता है।
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