मेरठ। वेब सीरीज तांडव पर प्रतिक्रिया देते हुए पंचदशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर श्रीश्री 1008 स्वामी राजराजेश्वरानंद गिरी जी महाराज ने कहा कि जो लोग ऐसी फिल्में बना रहे हैं वे बहुत गलत कर रहे हैं। अखाड़ों के माध्यम से इनका बहिष्कार किया जाएगा। कुंभ में इस मुद्दे को उठाया जाएगा। ऐसे लोगों पर प्रतिबंध लगाया जाना आवश्यक है। हमें भी ऐसी फिल्मों को देखना बंद करना होगा। ये विचार महाराज श्री ने राजेंद्र नगर स्थित बालाजी मंदिर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान व्यक्त किए।
यदि कोई भगवान पर हमारे सामने टिप्पणी करता है तो इस कृत्य के लिए हम स्वयं दोषी हैं। हमें इसका एकजुट होकर विरोध करना चाहिए। यदि ऐसा किसी अन्य धर्म या समाज के साथ होता तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गलती के बाद माफी मांगने से कुछ नहीं होता है। कुछ लोग अर्थ कमाने और टीआरपी बढ़ाने के लिए ऐसा कर रहे हैं।
आंखें खोलकर करें गुरु की खोज
महाराज श्री ने कहा कि हर चीज परंपरा और मर्यादा से चलती है। ऐसे धर्मगुरुओं के संपर्क में न रहें जिसका कोई कुल, वंश और परंपरा न हो। हिंदू धर्म पर एक परंपरा होती है। इसलिए जीवन के बड़े दायित्व गुुरु की खोज में आंखें बंद नहीं करनी चाहिए।
स्वयं सिद्ध होता है मंदिर
महाराज श्री ने कहा कि अमरनाथ, ज्वालाजी, वैष्णो देवी, मेहंदीपुर, सालासर में कहीं भी सिद्धपीठ नहीं लिखा है। शक्ति तो हमारे अंदर विद्यमान है। हमें उसे स्थापित करने की आवश्कता होती है। मंदिर में कुछ भी लिखने की जरूरत नहीं। वह स्वयं सिद्ध होता है। संत महात्मा जहां बैठ जाएं वहीं श्रद्धालु खिंचा चला आता है। हिमालय में साधु महात्मा तप करते हैं तो वे इसका प्रचार नहीं करते हैं। परमार्थ, आचरण और सेवा ही मनुष्य को ऊंचा बनाती हैं। ब्राह्मण को नित्य कर्म करना चाहिए।
प्रतिदिन स्वयं का रुद्राभिषेक करें
महाराज श्री ने कहा कि ब्राह्मण दरिद्र नहीं होता है। ब्राह्मण को सदाचारी, मार्गदर्शक लिखा जाना चाहिए। पूजापाठ का तरीका, स्वाध्याय हम पूरी तरह भूल चुके हैं। स्वयं का भी रुद्राभिषेक नित्य करना चाहिए।
महामंडलेश्वर का माल्यार्पण किया
श्रीबाला जी मंदिर में महामंडलेश्वर श्री 1008 स्वामी श्री राजराजेश्वरानंद गिरि जी महाराज के आशीर्वचन सुनने का अवसर प्राप्त हुआ। मंदिर के महंत एवं अध्यक्ष गुरुदेव नरेंद्र स्वामी एवं आचार्य मनीष स्वामी ने महामंडलेश्वर जी का माल्यार्पण किया। आचार्य कौशल वत्स द्वारा देव यज्ञ संपन्न कराया। आचार्य मनीष स्वामी ने श्रीराम के भजन गाए। यहां राकेश गोयल, संदीप गोयल, रचित सिंघल, सौरभ गर्ग, सोनू जौहरी रहे।