मां के साथ डॉ. विभाष राजपूत
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के रोहिणी में रहती हैं गृहिणी कुमकुम देवी। बेटा विभाष राजपूत डॉक्टर हैं और इन दिनों सीएचसी बागपत में अधीक्षक के रूप में तैनाती है। ढाई माह से मां ने बेटे को देखा तो सिर्फ वीडियो कॉल पर। पर मां तो आखिर मां है, वीडियो कॉल से दिल नहीं भरता। व्हाट्सएप के मैसेज सुकून नहीं देते।
कुमकुम देवी बताती हैं कि बेटे के बिना घर सूना है। परिवार जानता है कि देश और समाज के लिए उसके कर्तव्य हैं। बेटा अपनी ड्यूटी पर पूरी जिम्मेदारी के साथ डटा हुआ है। मां होने के नाते बेटे की याद भी आती है और उसकी चिंता भी सताती है। वह दुआ करती है कि सबके बेटे सुरक्षित रहें। डॉ. विभाष राजपूत कहते हैं कि मां की बहुत याद आती है। दुनिया मां ने दिखाई और अब उनके बच्चों की परवरिश भी मां ही कर रही है।
कोरोना प्रभावित क्षेत्र में ड्यूटी कर रही मां
एक ओर जहां देश में कोरोना वायरस का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है, वहीं महिलाएं भी दोहरी जिम्मेदारियां निभाते हुए पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कोरोना प्रभावित क्षेत्र में ड्यूटी कर रही हैं। ऐसी ही कुछ माताओं से मिलते हैं, जिन पर बच्चों को नाज है।
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नेहरू रोड निवासी डॉ. श्याम सोलंकी की पत्नी अनितेश बागपत के बड़ौत सीएचसी पर एएनएम है। फिलहाल अनितेश की ड्यूटी इस समय औसिक्का गांव में लगी हुई है। कोरोना पॉजिटिव केस मिलने के बाद औसिक्का को हॉटस्पॉट घोषित कर दिया गया था। उनके बेटे सचिन सोलंकी को उन पर नाज है। सचिन का कहना है कि लॉकडाउन में जहां लोग घरों में कैद है, वहीं मेरी मम्मी हॉटस्पॉट एरिया में ड्यूटी कर मरीजों की सेवा कर रही है। मुझे अपनी मम्मी पर नाज है।
बड़ौत निवासी ज्योति भी एएनएम है। इस समय ज्योति की ड्यूटी गोंडा जनपद के करनलगंज में चल रही है। ज्योति भी कोरोना प्रभावित क्षेत्र में ड्यूटी कर रही है। उनके बेटे रिदम व उनकी बेटी रिद्धिमा का कहना है कि हमें अपनी मम्मी पर गर्व है।
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