धूप को साया, जमी को,
आसमां करती है मां
हाथ रखकर मेरे सर पर, सायेबां करती है मां
मेरी ख्व़ाहिश और मेरी ज़िद
उसके क़दमों पर निसार,
हां की गुंजाइश न हो तो, फिर भी हां करती है 'मां'
मशहूर शायर नवाज देवबंदी की ये पंक्तियां मां के उस रूप को साक्षात परिलिक्षित करती हैं, जो हर मुश्किल में बच्चे का हाथ थामे हैं। संसार की तमाम दुश्वारियों को दरकिनार रख मां बच्चे की सफलता की दुआ मांगती है। हर कदम पर मां अपने बच्चे की शक्ति बनकर खड़ी होती है। जीवन की इन्हीं चुनौतियों का सामना कर, मम्मियों ने बच्चों को बोर्ड परीक्षा में सफल बनाया है।
सीबीएसई, आईसीएसई या यूपी बोर्ड 2019 की बोर्ड परीक्षाओं में 100 प्रतिशत अंक लाने वाले टॉपर सफलता का श्रेय मां को देते हैं। वो कहते हैं कि ये बोर्ड परीक्षाएं हमारी नहीं, बल्कि मम्मी की बोर्ड परीक्षा थी। अपनी पढ़ाई से ज्यादा मम्मी के सहयोग और योगदान से हम टॉपर बने। आज मदर्स डे पर हमें मौका मिला है कि अपनी मम्मी के लिए कुछ करें। मदर्स डे पर बोर्ड परीक्षा के टॉपर ने अपनी उन भावनाओं को साझा किया जिसे वो अपनी मां से कह नहीं पाए।
मेरे लिए खुद का कॅरियर भूल गईं मम्मी -वत्सल वार्ष्णेय
दीवान पब्लिक स्कूल से पढ़ाई कर सीबीएसई दसवीं की परीक्षा में ऑल इंडिया में टॉपर बने वत्सल वार्ष्णेय कहते हैं, मम्मी ने मेरे लिए अपने कॅरियर से बहुत कांप्रोमाइज़ किया। वत्सल की मम्मी डॉ. तरंग गोयल मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर हैं।
परिवार सोमदत्त विहार में रहता है। बकौल वत्सल मम्मी हमेशा मेरे खाने का ख्याल रखती। खुद जॉब पर जाती, लेकिन मेरी हर चीज को तैयार करके रखती। मैं टेंशन में न आऊं, मेरे पसंद का खाना बनाना, टाइम देने की पूरी कोशिश करती थीं। शाम 5 बजे घर आकर, मेरे सोने और खाने का पूरा ध्यान रखतीं। डिसीजन लेने में पूरा साथ देतीं। पूरे एक साल उन्होंने अपने एकेडमिक करियर और कांफ्रेंस पर ध्यान नहीं दिया।