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पड़ोसियों ने बच्चे दुखी कर दिए हैं, कोई नहीं सुनता, मां-बेटी के आत्मघाती कदम से पुलिस पर उठे सवाल

Thu, 25 Jul 2019 04:16 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
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एसपी दफ्तर पर मां व बेटी - फोटो : अमर उजाला
सूबे के आला अधिकारियों के सख्त आदेश के बावजूद जिले का पुलिस महकमा अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव लाने को तैयार नहीं हैं। इसका ताजा मामला यूपी के शामली में बुधवार को सामने आया।

पीड़ित महिला और बेटी की शिकायत पर चौसाना पुलिस कार्रवाई यदि समय रहते कर देती तो शायद मां-बेटी को एसपी दफ्तर में जहर खाने को मजबूर नहीं होना पड़ता। सिस्टम की लापरवाही के कारण ही महिला और उसकी बेटी को जीवन और मौत से मेरठ अस्पताल में संघर्ष करने के लिए विवश होना पड़ रहा है। 

 
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बेहोश महिला - फोटो : अमर उजाला
बुधवार दोपहर करीब 12 बजे एक महिला अपनी नाबालिग बेटी को साथ लेकर एसपी कार्यालय पहुंची। महिला ने एसपी के बारे में पूछा, तो पुलिसकर्मियों ने बताया कि कुछ देर पहले ही ऑफिस से गए हैं। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उनका शिकायती पत्र  कार्यालय में जमा कर लिया ओर उन्हें उचित कार्रवाई का भरोसा देकर भेज दिया। महिला अपनी बेटी के साथ गेट तक पहुंची। इसके बाद वह वापस आई। 

कार्यालय परिसर में करीब पांच मिनट तक इधर से उधर घूमती रही। इसी दौरान महिला ने अचानक कार्यालय परिसर में जहर की खाली शीशी दिखाई। कहा कि वह तो पुलिस के चक्कर काटकर थक गई। चौसाना पुलिस सुनती ही नहीं, अब वह जीना नहीं चाहती। कोई कुछ माजरा समझ पाता कि इतने में ही मां-बेटी की सेहत बिगड़ने लगी। महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें संभाला। बाद में उन्हें पुलिस गाड़ी से शामली सीएचसी ले गई।
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एसपी दफ्तर पर मौजूद मां बेटी - फोटो : अमर उजाला
पड़ोसियों ने मेरे बच्चे दुखी कर रख हैं... 
कीटनाशक खाने के बाद भी एसपी दफ्तर में बैठी मां और बेटी पुलिस को कोसती रहीं। चौसाना चौकी इंचार्ज से वह बेहद नाराज थी। बोलती रही  कि तीन बार आ चुकी हूं, साहब से भी मिलना नही हुआ। पीड़िता ने रोते हुए कहा कि आरोपियों ने मेरे बच्चे दुखी किए हुए हैं। मैं तीन बर आ चुकी ..., कहते कहते वह निढाल हो गई।

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बेहोश पड़ी छात्रा - फोटो : अमर उजाला
सल्फास को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं 
मां-बेटी ने जहर खाने के बाद शीशी को वहीं एसपी कार्यालय परिसर में डाल लिया। ये शीशी खाली थी। इस शीशी को देखने के बाद वहां मौजूद पुलिस वालों के हाथ पांव फूले। शीशी सल्फास की लग रही थी। हालांकि डॉक्टर रामनिवास ने बताया कि दोनों के पल्स और बीपी नार्मल थे।

एक के मुंह से सल्फास जैसी गंध थी, लेकिन वो सल्फास थी या कुछ और अभी ये स्पष्ट नहीं है। एसपी दफ्तर पर मां-बेटी के जहर खाने के बाद पुलिस हरकत में आ गई। एसपी के निर्देश पर सीओ कैराना गांव में पहुंचे और मामले की जांच की। सीओ ने घर पर मौजूद पीड़िता की बड़ी बेटी से बातचीत कर जानकारी ली। 
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shamli news, up polioce - फोटो : अमर उजाला
ननिहाल में रह रहा परिवार
झिंझाना थानाध्यक्ष ओपी चौधरी ने बताया कि पीड़ित परिवार पिछले काफी समय से ननिहाल में रह रहा है। जिन लोगों पर आरोप है वे भी उनके परिवार, रिश्तेदार हैं। पड़ोस में रहते हैं। पीड़िता की शिकायत पर पांच आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।

मामले की जांच की जा रही है। थाना प्रभारी का कहना है कि करीब छह माह पहले दोनों परिवारों के बीच रिश्तेदार की ट्रॉली चोरी होने में दूसरे पक्ष के दो युवकों पर शक जताने और दीवार विवाद का मामला सामने आया था, लेकिन लिखित में कोई शिकायत नहीं आई थी। पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुचलका पाबंद की कार्रवाई की थी। छेड़छाड़ करने की कोई शिकायत इससे पहले नहीं मिली थी। 
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shamli news, up polioce - फोटो : अमर उजाला
जहर की शीशी कहां से आई
मां-बेटी के जहर खाने के मामले में कई बिंदुओं पर जांच कर रही है। पुलिस इस बात की जांच कर ही है कि महिला के पास जहर की शीशी कहां से आई। अगर वे पहले से ही शीशी लिए हुए थी तो इससे माना जाएगा कि कहीं ये मामला प्री प्लान तो नहीं था।

अगर उनके पास यह पहले से नहीं थी तो उस समय उन्हें शीशी किसने दी। उन्हें किसी ने ऐसा करने के लिए उकसाया तो नहीं। पुलिस का कहना है कि सभी बिंदुओं पर गहनता से जांच की जा रही है। जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो सकेगी। एसपी ने चिकित्सकों से बातचीत कर बताया कि फिलहाल दोनों की स्थिति खतरे से बाहर है।
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धरने पर बैठी महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
वहीं घटना के विरोध में आरोपी पक्ष के समर्थन में गांव की महिलाएं और पुरुष ट्रैक्टर ट्रॉली में सवार होकर एसपी कार्यालय पहुंचे और धरना दिया। धरने पर भाकियू नेताओं ने भी पहुंचकर समर्थन दिया। ग्रामीणों ने एसपी से मिलकर इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की।
एसपी ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि इस मामले की जांच एएसपी द्वारा की जा रही है। बिना किसी साक्ष्य के किसी की गिरफ्तारी नहीं होगी। निष्पक्ष कार्रवाई होगी और किसी निर्दोष को जेल नहीं भेजा जाएगा। इस आश्वासन पर ग्रामीणों ने धरना समाप्त किया।
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