मरीजों की जांच करतीं डॉ. मंजू मित्तल
- फोटो : अमर उजाला
मेरठ में रेलवे रोड की रहने वाली महिला बेटे की मौत के बाद डॉक्टर बन गईं और लोगों का नि:शुल्क इलाज करना शुरू कर दिया। यह सेवा वह लगातार 26 साल से कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उनके यहां उत्तराखंड, महाराष्ट्र, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और मेरठ सहित पूरे उत्तर प्रदेश से मरीज आते हैं।
डॉ. मंजू मित्तल (70) पत्नी सतेंद्र प्रकाश मित्तल रेलवे रोड थाना क्षेत्र के रामकुटीर में रहती हैं। उनके दो बेटे हरित मित्तल और लसित मित्तल थे। जब बड़ा बेटा नौ साल का था तो वह अचानक बीमार हो गया। डाक्टरों को दिखाने के बाद भी हरित को बचाया न जा सका। हरित की मौत से मंजू बुरी तरह टूट गईं। उन्होंने प्रण लिया कि वह डॉक्टर बनकर लोगों की मदद करेंगी। उन्होंने होम्योपैथिक में प्रैक्टिस शुरू कर दी। धीरे-धीरे ऐसे मरीज भी उनके पास आने लगे जो एलोपैथिक की दवा खाकर भी ठीक नहीं हो रहे थे। इस बीच छोटा बेटा लसित मित्तल इंजीनियर बन गया। दवा लेने आए राजीव बंसल निवासी थापरनगर ने बताया कि उन्हें डाक्टरों ने बाईपास सर्जरी कराने के लिए कहा था। यहां इलाज कराने के बाद आराम मिला।
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मकबरा निवासी यूनुस ने बताया कि वह ड्राइवर है। काम के दौरान वजन गिरने से अंदरूनी चोटें आई थी। डॉक्टरों ने मना कर दिया था, लेकिन यहां इलाज से ठीक हो गया। शात्रीनगर निवासी प्रवीण गुप्ता ने बताया कि वह पेट की बीमारी से परेशान थे, जब कई जगह डॉक्टरों की दवाओं से आराम नहीं मिला तो यहां इलाज कराया। अब आराम है।
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