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सुबह पढ़ाई और शाम को जीविका की लड़ाई, उम्र से पहले हुए बडे़

Fri, 07 Jul 2017 05:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ संजू सिंह, मेरठ
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स्कूल में सचिन ओर निखिल
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खुद को कर बुलंद इतना कि खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है। ये लाइन शहर के उन दो होनहार बच्चों पर सटीक बैठती है, जो अपनी मेहनत के बल पर सपनों को साकार करने में लगे हैं। ये बच्चे हैं कैंट (वीर वाला पथ) निवासी सचिन और निखिल। दोनों सगे भाई हैं। इनकी उम्र महज 11 और 9 साल की है। बच्चे सदर स्थित चर्च सिटी जूनियर हाईस्कूल में कक्षा दो के छात्र हैं। लेकिन पढ़ाई को लेकर इनका जज्बा इन्हें दूसरे बच्चों से अलग करता है। छोटी उम्र में इनकी मां घर छोड़कर चली गई। अब ये खुद घर की जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। सुबह पढ़ाई करते हैं और शाम को आबूलेन पर गुब्बारे बेचते हैं। छोटी उम्र में ही बीमार पिता का सहारा बन गए हैं। 
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आर्थिक तंगी से बिखरा परिवार
करीब दो साल पहले सचिन और निखिल का परिवार आर्थिक तंगी के कारण बिखर गया, जब उनकी मां सोनिया पति राजू पासवान को छोड़कर चली गई। इस दौरान पिता कामकाज भी छोड़ बैठा। घर के हालात ने सचिन और निखिल को समय से पहले ही समझदार बनने पर मजबूर कर दिया। आखिरकार उन्होंने घर की जिम्मेदारी के साथ पिता को संभाला। फिलहाल उनके पिता एक गैराज में चौकीदारी करते हैं। इसके एवज में मालिक ने उन्हें कारखाने में रहने की जगह दे दी है। राजू अक्सर बीमार भी रहता है।
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...और परिंदों को मिली परवाज

सचिन और निखिल आबूलेन पर गुब्बारे बेचते
दो साल पहले सचिन व निखिल जब अपने हमउम्र बच्चों को स्कूल जाते देखते तो मन मसोस कर रह जाते थे। लेकिन एक दिन उन्हें गॉडफादर मिल ही गया। सदर रंजीतपुरी निवासी युवती श्वेता ने इनके बारे में जाना। बच्चों ने उनसे पढ़ने की इच्छा जाहिर की। इस पर श्वेता ने सदर कलाल खाना स्थित चर्च सिटी जूनियर हाईस्कूल में 2014 में दोनों का दाखिला करा दिया। इसके बाद तो जैसे सचिन और निखिल को पंख लग गए। वक्त के साथ इनका हौसला बढ़ता चला जा रहा है। 

अपनी कमाई और अपनी पढ़ाई
सचिन और निखिल ने बताया कि वह गुब्बारे और स्टिक लाला के बाजार से लाते हैं। इसके बाद आबूलेन बाजार में बेचते हैं। इससे उनका घर और पढ़ाई का खर्च चलता है। सचिन का कहना है कि वह मेहनत से काम करेगा, लेकिन किसी के आगे हाथ नहीं फैलाएगा। 

उम्र से पहले हुए बडे़
प्रधानाचार्या मुनेश कुमारी ने बताया कि सचिन और निखिल पढ़ने में होशियार हैं। इनका जीवन वयस्क लोगों जैसा है। ये बच्चों की तरह शैतानियां नहीं करते हैं। क्लास टीचर निमलेश यादव का कहना है की बच्चे पढ़ाई में बहुत रुचि लेते हैं। भाइयों की पढ़ाई में रुचि को देखते हुए स्कूल टीचर्स किताब, कापी, पेंसिल व अन्य सामान उपलब्ध करा देती हैं।

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