बुखार व कोरोना से 20 दिन में 80 से अधिक मौत
दौराला। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद जैसा सोचा जा रहा था, हालात उससे भी कहीं अधिक खराब हो चले हैं। कोरोना ने देहात में पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। आलम यह है कि गांवों में अधिकांश ग्रामीण बुखार व कोरोना से पीड़ित हैं। गांवों में मौत का लगातार सिलसिला जारी है। परंतु, प्रशासन गांवों की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। जिस कारण ग्रामीणों की असमय मौत हो रही है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रचार-प्रसार के दौरान कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन प्रत्याशियों व ग्रामीणों ने नहीं किया। लगातार उमड़ती भीड़ देखकर कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका जताई जा रही थी। हुआ भी कुछ ऐसा ही। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव खत्म होते ही गांवों में बुखार व कोरोना ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है।
आलम यह है कि दौराला क्षेत्र का कोई गांव ऐसा नहीं बचा, जहां बुखार से पीड़ित ग्रामीण न हो। पिछले 20 दिन में दौराला क्षेत्र के विभिन्न गांवों व कस्बों में 80 से अधिक लोग मौत के मुंह में समां चुके हैं। परंतु, प्रशासन गांवों व कस्बों की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। मौत का सिलसिला जारी रहने के बावजूद गांवों में कैंप की व्यवस्था नहीं की जा रही है। शपथ ग्रहण समारोह न होने से नवनिर्वाचित प्रधानों को अभी तक चार्ज नहीं मिल सका है। जिस कारण गांवों में सफाई का कार्य समय से नहीं हो पा रहा है।
निगरानी समिति व आशा की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
कोरोना संक्रमण फैलने के बाद सरकार ने गांवों व कस्बों में निगरानी समिति का गठित करने का आदेश जारी किया था। इनका कार्य यह था कि वह घर-घर जाकर सर्वे कर बुखार, जुकाम व खांसी से पीड़ित लोगों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दे। ताकि, उनकी जांच कर समय पर उपचार दिया जा सके। लेकिन, निगरानी समिति व आशाएं अपना कार्य बखूबी नहीं निभा रहे है।
नलकूप ऑपरेटर की कोरोना से मौत
दौराला निवासी नलकूप ऑपरेटर देवेंद्र कुमार सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग चालक के पद पर दौराला ब्लॉक में तैनात थे। उनकी ड्यूटी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जानी ब्लॉक में लगी थी। तीन दिन की ड्यूटी सेआने के बाद वह कोरोना संक्रमण की चपेट में आ गए। जिससे सोमवार को उनकी मौत हो गई।
प्रधान ने कराया गांव में सैनिटाइजेशन
मीठेपुर गांव के नवनिर्वाचित प्रधान पदमेंद्र सिंह चेयरमैन ने गांव में बुखार व कोरोना का प्रकोप बढ़ते देख अपने खर्च पर मंगलवार को गांव में सैनिटाइजेशन कराया। उन्होंने कहा कि वह गांव में लगातार सैनिटाइजेशन कराते रहेंगे। उन्होंने व्हाट्सएप पर एक ग्रुप बनाकर ग्रामीणों को उसमें जोड़ा है और ग्रामीणों से सुझाव मांग कर उस पर कार्य कर रहे हैं।
यह है कारण
- हाईवे किनारे के गांव सबसे अधिक प्रभावित।
- गांवों में मास्क व दो गज की दूरी का पालन नहीं हो रहा।
- निगरानी समिति व आशाएं भी नहीं निभा रही अपनी जिम्मेदारी।
- समय से गांवों को नहीं किया जा रहा सैनिटाइजेशन।
- प्रधानों को नहीं मिल सका चार्ज, सफाई की व्यवस्था चरमराई।
- कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद भी ग्रामीण नहीं कर रहे गाइडलाइन का पालन।
- स्वास्थ्य विभाग समय से नहीं लगा रहा कैंप, टीकाकरण में भी ग्रामीण कम ले रहे रुचि
इन गांवों में सबसे अधिक कहर
- सकौती : मुनव्वर, पत्नी शाहजहां, मां, नीरज, संतरा, रेखा, पूर्व प्रधान राजेंद्र की पत्नी, किरणपाल आदि।
- मटौर : अनूप, मोहित, शैंकी, गर्भवती महिला समेत 15 से अधिक की मौत।
- रुहासा : रजनी, फरजाना, गीता, शकुंतला, सूदी, बिजे, रूलिया, ननवा, मुशर्रफ, संदीप मित्तल की माता व अमित की पत्नी।
- लोईया : महेंद्री, बती, सुमरती, अजयपाल, नसरीन आदि।
- दौराला : मिल कर्मचारी प्रमोद, नलकूप ऑपरेटर देंवेंद्र, जीत सिंह अहलावत, दो व्यापारियों की पत्नी, मीठेपुर के पूर्व प्रधान आफताब आदि।