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महामारी की मार: शहर भर में सोशल डिस्टेनसिंग की दरकार

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स्वैच्छिक बंदी में भी कम नहीं हुई बाजारों में भीड़
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मेरठ। कोरोना संक्रमण की रफ्तार पर ब्रेक लगाने के लिए अधिकतर व्यापारी संगठनों ने मंगलवार से एक सप्ताह तक स्वैच्छिक बंदी की घोषणा की थी। दावा किया गया था कि करीब 80 फीसदी प्रतिष्ठान बंद रहेंगे, लेकिन कोरोना कर्फ्यू और साप्ताहिक बंदी के बाद मंगलवार को बाजारों में फिर से भीड़ उमड़ पड़ी।
कई प्रमुख बाजारों में सोशल डिस्टेेंसिंग से लेकर कोविड नियमों के पालन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। महज 20 फीसदी प्रतिष्ठान ही बंद रह सके। अन्य बाजारों में भीड़ और जाम के हालात बने रहे। पुलिस प्रशासन की टीमें लगातार चेतावनी दे रही हैं कि कोरोना महामारी की मार में सोशल डिस्टेंसिंग की दरकार सबसे अधिक है।
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संयुक्त व्यापार संघ के दोनों गुटों सहित अन्य व्यापारिक संगठनों ने स्वैच्छिक बंदी का आह्वान किया था। मंगलवार को शहर के मुख्य बाजारों में ट्रैफिक आम दिनों से ज्यादा रहा। सुबह से शाम तक लोगों को कई बार जाम से जूझना पड़ा। सराफा, सदर, आबूलेन, बॉम्बे बाजर, खंदक बाजार तक ही व्यापारियों का बंदी का प्रयास सीमित रहा। पुराने शहर में भारी अव्यवस्था रही। कोटला बाजार, कोटला मंडी, खैरनगर, वैली बाजार, कबाड़ी बाजार में शाम तक काफी संख्या में लोगों की आवाजाही रही। खैरनगर रोड पर भी हालात बेकाबू नजर आए। एक दुकान के छोटे से काउंटर पर 10 से 15 ग्राहक तक दिखे।
घंटाघर चौराहे पर फेरी वाले, ठेले वाले, फल विक्रेता, टेंपो, ई-रिक्शा के कारण जाम के हालात बने रहे। ये ही हाल जली कोठी से बुढाना गेट तक रहा। दरअसल, महामारी से ज्यादा लोगों को संपूर्ण लॉकडाउन का डर सता रहा है। ऐसे में लोग घर पर जरूरी सामान का स्टॉक कर रहे हैं।
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सूरजकुंड क्षेत्र में नजर आया बंदी का असर
- सूरजकुंड क्षेत्र में 90 प्रतिशत व्यापारियों की बंदी कारगर रही। इक्का दुक्का दुकान को छोड़ बाकी बाजार बंद था। वहीं, भगत सिंह मार्केट, गोला किआं और लिसाड़ी क्षेत्र के बाजार पूरी तरह खुले रहे। ग्राहकों ने जमकर खरीददारी की। इस क्षेत्र में ज्यादातर लोगों ईद के लिए खरीद शुरू कर दी है। गढ़ रोड, सेंट्रल मार्केट, शास्त्री नगर और जागृति विहार में कुछ दुकानें बंद रहीं, बाकी जगह बाजार खुले रहे। शादी और मांगलिक कार्यों के लिए अलग से खरीदारी की गई।
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