निजी अस्पतालों की मनमानी की जांच शुरू
मेरठ। निजी अस्पतालों की मरीज भर्ती करने को लेकर मनमानी पर जांच शुरू हो चुकी है। शनिवार को एसीएम सुनीता सिंह ने तीन अस्पतालों की जांच की। आरोप है कि इस दौरान केएमसी अस्पताल में एसीएम सहित जांच कमेटी से अभद्रता की गई। वहीं केएमसी के निदेशक ने अभद्रता के आरोप से इनकार किया है।
कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के बीच निजी अस्पताल मनमानी पर उतर आए हैं। शुक्रवार को भाजपा नेता और जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन मनिंदरपाल सिंह ने भी इसके लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि इससे पहले ही मंडलायुक्त सुरेंद्र सिंह ऐसी शिकायतों की जांच शुरू करा चुके हैं। गाजियाबाद में भी ऐसा मामला सामने आने के बाद उन्होंने मंडल के सभी जनपदों में भौतिक सत्यापन करने के साथ ही जांच के आदेश दिए।
शनिवार को एसीएम सुनीता सिंह और सर्विलांस अधिकारी डॉ. अशोक तालियान के नेतृत्व में टीम जांच के लिए निकली। इस टीम ने आनंद अस्पताल, अजय अस्पताल और केएमसी अस्पताल में जांच की। जांच के दौरान आनंद और अजय अस्पताल ने जांच टीम को अपने रिकॉर्ड दिखाए, लेकिन केएमसी अस्पताल ने रिकॉर्ड दिखाने से इनकार कर दिया। इसको लेकर केएमसी प्रबंधन और जांच टीम के में काफी देर तक कहासुनी हुई।
सूत्रों के अनुसार केएमसी अस्पताल के कर्मचारियों ने पहले बताया कि उनके यहां 250 कोविड मरीज भर्ती हैं। बाद में बताया कि 188 मरीज भर्ती हैं लेकिन किसी का भी रिकॉर्ड नहीं दिखाया। इस बीच अस्पताल के प्रबंध निदेशक डॉ. सुनील गुप्ता मौके पर पहुंच गए और उनकी एसीएम से जमकर बहस हुई।
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डीएम को सौंपी है रिपोर्ट: एसीएम
एसीएम सुनीता सिंह ने बताया कि उन्होंने जिलाधिकारी को आनंद और अजय अस्पताल के साथ ही केएमसी में जो भी कुछ हुआ, उसकी रिपोर्ट सौंप दी है। अब इस पर जिलाधिकारी कार्रवाई करेंगे।
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188 मरीज बताए, रिकॉर्ड नहीं दिखाया
टीम के साथ गए सर्विलांस अधिकारी डॉ. अशोक तालियान का कहना है कि निरीक्षण के दौरान 188 कोविड मरीज भर्ती होना बताया गया था लेकिन रिकॉर्ड नहीं दिखाया। वहां एसीएम सदर से अभद्रता भी की गई।
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कमी निकालने का मन बनाकर आई थी टीम
केएमसी अस्पताल के चेयरमैन डॉ. सुनील गुप्ता ने बताया कि निरीक्षण करने आई टीम को कहा गया कि वह भौतिक सत्यापन करें। टीम ने निरीक्षण करने से मना कर दिया। ऐसा लग रहा था कि वह तय करके आए थे कि कमी निकालनी है। इस तरह का निरीक्षण सिर्फ उत्पीड़न है। रिकॉर्ड में तो गडबड भी हो सकती है लेकिन भौतिक सत्यापन तो पूरी तरह सही होता। हमारे अस्पताल में 250 बेड की अनुमति है और नियमानुसार इलाज किया जा रहा है। इस बारे में डीएम को भी पत्र भेजा गया है।