कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ का 38वां दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 38वें दिन विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि संसार का प्रत्येक प्राणी सुख की तलाश में है लेकिन वास्तविक सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि अपने भीतर निहित है। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य दूसरों की ओर देखने की प्रवृत्ति को नहीं छोड़ता, तब तक उसे सच्चा संतोष और सुख तीनों कालों में प्राप्त नहीं हो सकता। आज का मनुष्य अपने सुख को दूसरों की स्थिति, संपत्ति और उपलब्धियों से जोड़कर देखता है। इस कारण वह निरंतर असंतोष और अशांति में जीता है। जीवन को सही अर्थों में समझना और उसके मूल उद्देश्य से जुड़ना ही वास्तविक समाधान है। आत्म कल्याण को जीवन का प्रमुख लक्ष्य बनाना चाहिए तभी मनुष्य सच्चे सुख की अनुभूति कर सकता है।
भाव भूषण महाराज ने कहा कि धन और पैसा केवल जीवन निर्वाह के साधन हैं। उन्हें जीवन का साध्य नहीं बनाना चाहिए। जब मनुष्य साधन और साध्य के बीच का अंतर भूल जाता है तब जीवन में असंतुलन पैदा होता है और दुखों का जन्म होता है। इसलिए आवश्यक है कि मनुष्य अपनी आवश्यकताओं को सीमित रखे और संतोष का भाव विकसित करे। मुनिराज ने श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन, संयम और साधना के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। विधान का विसर्जन गुरुकुल के बच्चों ने किया। पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन कैलाशचंद जैन, हिमांशु जैन ने किया।
इससे पूर्व स्वर्ण कलश से अभिषेक कैलाशचंद जैन, हिमांशु जैन, शांतिधारा आशीष जैन, प्रकाश जैन, ऋषभ जैन, सुशील जैन अरिहंत जैन, दीप का प्रज्ज्वलन आराध्या जैन, अमिता जैन और सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। विधान कराने वाले धर्मप्रेमी बंधुओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। 81 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया।
इस मौके पर क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, विपुल जैन, पंकज जैन, मनोज जैन, धनपाल जैनी का सहयोग रहा।