मेरठ। शहर की सड़कें टूटी पड़ी हैं। नालों की दीवारें गिरने से ड्रेनेज व्यवस्था ध्वस्त होती जा रही है। विकास कार्य नहीं होने से जनता समस्याओं से जूझ रही है। इसके बाद भी नगर निगम इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। निगम की तजोरी में अवस्थापना और 14वें वित्त आयोग का धन भी आ चुका है, लेकिन बैठक न हो पाने के कारण सभी काम अटके पड़े हैं।
महानगर के सभी 90 वार्ड विकास को तरस रहे हैं। बरसात के दौरान शहर की अधिकतर सड़कें टूट चुकी हैं। कहने को बरसात से पहले निगम ने अवस्थापना और बोर्ड फंड से कुछ सड़कों को बनाने का ठेका दिया था, लेकिन उनमें से कई का काम अधूरा पड़ा है। कई जगह तो काम शुरू भी नहीं हो सका है। उधर जल निगम ने भी शहर के कई इलाकों में छह माह पहले सीवर लाइन डाली थी, लेकिन उन मार्गों की मरम्मत नहीं कराई।
अगर हम शहर के विकास की बात करें तो इस समय 100 करोड़ के कार्यों की जरूरत हैं। लेकिन काम ठप पड़े हैं। निगम फंड से ठेकेदारों को भुगतान भी नहीं मिल रहा है। अवस्थापना निधि में निगम के पास 25 करोड़ रुपये बताए जा रहे हैं। वहीं टीएफसी में भी सरकार ने धन जारी कर दिया है। दोनों निधि से शहर की सड़क और कई नाले ठीक हो सकते हैं। लेकिन निगम के अधिकारी गंभीर नहीं दिख रहे हैं।
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टीएफसी और अवस्थापना से होने वाले कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। लगभग कार्रवाई पूरी हो चुकी है। बैठक की तिथि निर्धारित नहीं हुई है। -यशवंत कुमार, चीफ इंजीनियर नगर निगम।
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अधिकारियों को प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। दो दिन के भीतर बैठक के संबंध में पत्र जारी कर दिया जाएगा। अवस्थापना और टीएफसी की बैठक एक साथ होगी। -सुनीता वर्मा, महापौर