मुकाबला टक्कर का हो गया। एक समय ऐसा रहा जब एक लाख 13 हजार वोटों की मतगणना हो गई और इसमें राजेन्द्र अग्रवाल को 11 हजार वोटों की लीड मिल गई। इसके बाद फिर से याकूब की वोटों का ग्राफ बढ़ा और यह अंतर और कम हो गया।
दरअसल यह मुकाबला इतना कड़ा रहा जब दोनों ही पार्टी के धुरंधरों के पसीने छूटते रहे। एक बार तो राजेन्द्र अग्रवाल के खेमें में भी पूरी तरह से मायूसी छा गई। वह बीच में चले भी गए पर जब यह लगा कि बाजी हाथ से निकल रही है तो वापस लौट आए।
उधर अंतर इतना मामूली रहा गया कि हाजी याकूब कुरैशी शाम को खुद मतगणना स्थल पर आ गए। दरअसल उनके पुुत्र फिरोज ने भी आपत्ति दर्ज करा दी था कि कुछ गड़बड़ी है। अभी काउंटिंग चल रही है और भाजपाइयों को जीता हुआ बताया जा रहा है।
आखिरकार रात को उस समय तक भाजपाइयों के भी होश उड़े रहे जब लगभग साढ़े आठ बजे याकूब कुरैशी ने पंडाल से बाहर आकर खुद कहा कि वह हार गए हैं और वह लोकतंत्र के इस फैसले को स्वीकार करते ह्रैं।
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