कलाकार पद्मभूषण पंडित विश्वमोहन भट्ट
- फोटो : अमर उजाला
पं. विश्व मोहन भट्ट ने प्रस्तुति से पहले श्रोताओं का परिचय अपने साज मोहनवीणा से कराया। इस साज का अविष्कार स्वयं पंडित भट्ट ने किया है, इसलिए इसका नाम मोहनवीणा पड़ा। मोहनवीणा में गिटार और वीणा के तारों का संयोजन है। 20 तार और तंबूरे की जगह गिटार के आगे का भाग शामिल कर यह वाद्ययंत्र बना है।
हर बार नया लगता है मेरठ
पं. विश्व मोहन भट्ट ने कहा कि मेरठ जब भी आता हूं, हर बार नएपन का अहसास होता है। दीवान पब्लिक स्कूल में स्पिक मैके के सौजन्य से कई बार छात्रों से रूबरू हुआ। इस विद्यालय का वातावरण, यहां की घास, घने वृक्ष गायन की प्रेरणा और सकारात्मक माहौल देते हैं।
मोहनवीणा और वो पसंदीदा स्कूटर का एक्सल
पं. विश्वमोहन ने बातचीत में बताया कि मोहनवीणा पर तारों को झंकृत करने के लिए वो आज भी अपने कॉलेज के दिनों के पुराने वेस्पा के स्कूटर का एक्सल इस्तेमाल करते हैं। एक्सल से तारों में सटीक कंपन आता है, बस तभी से इस एक्सल से वो मोह छोड़ नहीं पाए।
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