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प्रेम की स्मृति में झंकृत हुई मोहनवीणा, एक क्लिक में पढ़ें

Sun, 15 Apr 2018 01:06 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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आयोजित कार्यक्रम में कलाकार पद्मभूषण पंडित विश्वमोहन भट्ट - फोटो : अमर उजाला
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वीणा के तारों को मोहनवीणा के रूप में ढालकर साज को नया रूप देने वाले महान सितार वादक पंडित रविशंकर के शिष्य, अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार पद्मभूषण पंडित विश्वमोहन भट्ट ने शनिवार की शाम खास रूहानी स्पर्श दिया। कैराना घराने के गायक स्वर्गीय प्रेमप्रकाश जौहरी की स्मृति में शनिवार को दीवान पब्लिक स्कूल में परंपरा संगीत संध्या का आयोजन हुआ। आयोजक स्वर्गीय प्रेमप्रकाश जौहरी के बेटे राकेश जौहरी और मनिका जौहरी व संगीत प्रेमी अनूप सिंघल रहे।

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राकेश जौहरी ने अपने पिता प्रेमप्रकाश जौहरी का परिचय देते हुए बताया कि वे आरजी पीजी कॉलेज में लंबे समय तक संगीत शिक्षक रहे। रागों पर हस्तलिखित पुस्तक भी है। प्रेमप्रकाश जौहरी की स्मृति में पंडित विश्व मोहन भट्ट ने मोहनवीणा झंकृत किया, तो ढलती रात के साथ सुर, संगीत का सौंदर्य सर्वश्रेष्ठ स्तर पर पहुंच गया। 1994 में पंडित भट्ट ने अमेरिका में मीटिंग बाई द रिचर्ड की प्रस्तुति दी थी, इसके लिए उन्हें श्रेष्ठ सम्मान ग्रैमी अवार्ड से सम्मानित किया गया। अब देश-विदेश में इनके शिष्य भारतीय संगीत का विस्तार कर रहे हैं। इस अवसर पर दीवान पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल एचएम राउत ने पं विश्वमोहन भट्ट, बनारस घराने के ताबलिक अभिषेक मिश्रा व पंडित जी के बेटे सलिल भट्ट का स्वागत किया।  

श्रमसाध्य वाद्य पर गूंज उठी कोयल की कूक
मैहर घराने से ताल्लुक रखने वाले पंडित विश्वमोहन भट्ट ने शाम का आगाज अपने पसंदीदा राग शिवरंजिनी से किया। राग के साथ अलाप जोड़ झाला की प्रस्तुति से श्रोता झूम उठे। लगभग 30 मिनट तक सरगम का संगीत, विभिन्न तालों में मोहनवीणा पर अठखेलियां करता रहा। ताबलिक अभिषेक मिश्रा की संगतकारी में पं. विश्वमोहन भट्ट ने राग श्यामकन्या दोनों मध्यकों का प्रयोग करते हुए बजाया। संगीत के माधुर्य में डूबते श्रोताओं को उन्होंने वोकल का खख्याल करते हुए कोई सुर कैसे साज पर उतरता है इससे अवगत कराया। आमों के बाग में कूकती कोयल का सुमधुर स्वर सात सुरों में बजाया। रागेश्वरी और कुछ फरमाइशी राग भी बजाए। अंत में पसंदीदा गीत वंदेमातरम को बजाते हुए पंडितजी ने साज और संगीत संध्या को सात्विक विराम दिया। अपना पसंदीदा राग झिंझोटी, बागेश्री, मालगुंजी बजाया। संगीत प्रेमियों ने मोहनवीणा के हर तार पर तालियों की बंदिशों से साज से सजी शाम को नई ऊंचाईयां बख्शी। तबले पर मशहूर ताबलिक अभिषेक मिश्रा की संगतकारी बेजोड़ रही।

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गिटार, वीणा का सम्मिश्रण मोहन वीणा 

कलाकार पद्मभूषण पंडित विश्वमोहन भट्ट - फोटो : अमर उजाला
पं. विश्व मोहन भट्ट ने प्रस्तुति से पहले श्रोताओं का परिचय अपने साज मोहनवीणा से कराया। इस साज का अविष्कार स्वयं पंडित भट्ट ने किया है, इसलिए इसका नाम मोहनवीणा पड़ा। मोहनवीणा में गिटार और वीणा के  तारों का संयोजन है। 20 तार और तंबूरे की जगह गिटार के आगे का भाग शामिल कर यह वाद्ययंत्र बना है। 

हर बार नया लगता है मेरठ 
पं. विश्व मोहन भट्ट ने कहा कि मेरठ जब भी आता हूं, हर बार नएपन का अहसास होता है। दीवान पब्लिक स्कूल में स्पिक मैके के सौजन्य से कई बार छात्रों से रूबरू हुआ। इस विद्यालय का वातावरण, यहां की घास, घने वृक्ष गायन की प्रेरणा और सकारात्मक माहौल देते हैं। 

मोहनवीणा और वो पसंदीदा स्कूटर का एक्सल 
पं. विश्वमोहन ने बातचीत में बताया कि मोहनवीणा पर तारों को झंकृत करने के लिए वो आज भी अपने कॉलेज के दिनों के पुराने वेस्पा के स्कूटर का एक्सल इस्तेमाल करते हैं। एक्सल से तारों में सटीक कंपन आता है, बस तभी से इस एक्सल से वो मोह छोड़ नहीं पाए।

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