ये चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी है। यहां कभी मूल्यांकन में खेल तो कभी कॉपियां बदलने का फर्जीवाड़ा। लाखों छात्रों की मेहनत को यूनिवर्सिटी के बीमार सिस्टम ने मजाक बनाकर रख दिया है। और अब तो हद है। डॉक्टर की डिग्री को भी लोग इस नजर से देखने लगें तो ताज्जुब नहीं।
सीसीएसयू के अंतर्गत नौ जिलों के 66 एडेड और राजकीय कॉलेज आते हैं। बीएड, बीबीए, एमबीए, एलएलबी और दूसरे कोर्सों वाले कॉलेजों को जोड़ लें तो उनकी संख्या आठ सौ करीब पहुंच जाती है। मेरठ, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, बुलंदशहर, हापुड़, गाजियाबाद और नोएडा के इन कॉलेजों में लाखों छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। इन्हीं कॉलेजों से निकले होनहार छात्र-छात्राएं देश में नाम रोशन कर रहे हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल, सेना के लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत जैसी शख्सियतों ने चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में शिक्षा ली है। यहां पर सब छात्र-छात्राएं नकलची नहीं हैं। सबके पास ऐसे बेईमान लोगों तक पहुंचने का रास्ता भी नहीं है। इतनी मोटी रकम देकर पास होने के लिए पैसे भी नहीं हैं। ऐसे में शिक्षा माफियाओं के ग्राहक वे छात्र-छात्राएं रहते हैं जिनके पास पैसा है। लेकिन पढ़ने के लिए वक्त नहीं। इन्हीं के कारण यूनिवर्सिटी का पूरा सिस्टम घूसखोरी का रोगी बन जाता है।
अब तक तो बात बीए, बीएससी, बीकॉम, एमए, एमकॉम, एमएससी और एलएलबी की थी। लेकिन अब तो हद हो गई है। एमबीबीएस जैसी परीक्षा को भी मजाक बना दिया गया है। ऐसे में अब तक तो लोग सिर्फ यहां से ग्रेजुएट और पीजी करने वाले छात्र-छात्राओं की डिग्री को शक की नजर से देखते थे। लेकिन अब वही हाल एमबीबीएस का भी न हो जाए। हम यहां से निकले सभी डॉक्टरों की बात नहीं कर रहे हैं। लेकिन जिन डॉक्टरों ने घूस देकर सीसीएसयू के बीमार सिस्टम से अपनी बीमार कॉपियां बदलवाकर डिग्री ले ली। वे भला मरीजों का क्या इलाज करेंगे। इन डॉक्टरों को कैसे चिह्नित किया जाएगा। ये तो सिर्फ एक रैकेट पकड़ा गया है, क्या पता दूसरे भी इस खेल को अंजाम दे रहे हों। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि ऐसे बीमार डॉक्टर समाज में अपनी क्या सेवा देंगे।
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