केस एक
थाना लिसाड़ी गेट क्षेत्र की 38 वर्षीया एक महिला की शादी को 10 साल हो गए हैं। पति मोबाइल की दुकान चलाता है। दो बच्चे हैं एक तीन साल का बेटा और पांच साल की बेटी। लेकिन, वह बच्चों पर ध्यान नहीं देता है।
केस दो
पत्नी का कहना है कि पति के सारे काम मुझे ही करने पड़ते हैं। वह बस फोन कॉल पर लगा रहता है और इस बारे में बात करने पर वह मारपीट भी करता है। ऐसे में मुझे अपने बच्चों के भविष्य की चिंता है। अब मैंने पति से अलग रहने का फैसला कर लिया है, इसलिए तलाक की अर्जी डाली है।
केस तीन
परतापुर थाना क्षेत्र निवासी 35 वर्षीय महिला ने बताया कि पांच साल शादी को हो चुके हैं और तीन साल की एक बेटी है। पति न बेटी को गोद में लेता है और न घुमाने जाता। खाली समय में बस चैटिंग करता रहता है। तीन महीने से समझा-समझा कर थक गई हूं।अब अलग रहना चाहती हूं।
केस चार
गंगानगर निवासिनी 37 वर्षीया महिला का पति निजी अस्पताल में काम करता है। घर आकर भी मरीजों से फोन पर ही लगा रहता है। बच्चों को पीटता है, गालियां देता है। महिला ने मानसिक उत्पीड़न का केस लगाया है और अब अलग होना चाहती है।
ज्यादातर मामलों में चक्कर नहीं, सिर्फ फोन की लत है। काउंसलिंग से कई घर बच रहे हैं, पर कुछ वहा पहुंचते-पहुंचते टूट जाते हैं। आंकड़ों पर गौर कर जाए तो प्रतिदिन पांच से सात मामले इस तरह के आ रहे हैं। -सुमन,प्रभारी, परिवार परामर्श केंद्र
मोबाइल की दुनिया से बाहर निकलो। एक-दूसरे को समय दो, विश्वास रखो। जो डिवाइस हमें जोड़ने आया था, वही रिश्ते तोड़ रहा है। -डॉ. विभा नागर,मनोचिकित्सक