ज्योतिष और मेडिकल साइंस के इस नए मेल को परिवार तेजी से अपनाते दिखाई दे रहे हैं। टैरो कार्ड रीडर हेमा शर्मा के अनुसार सिर्फ अक्टूबर–नवंबर में ही 50 से अधिक विवाह टैरो कार्ड रीडिंग के आधार पर तय हुए। वह बताती हैं कि विवाह के लिए ‘द लवर्स’ और ‘मैरिज कार्ड’ निकलना शुभ संकेत माना जाता है और इसे ग्रीन सिग्नल की तरह स्वीकार किया जाता है।
ज्योतिषाचार्य कौशल बताते हैं कि शादी तय करते समय पारंपरिक कुंडली मिलान के साथ सातवें भाव के स्वामी को देखा जाता है। अब इसके साथ मेडिकल एस्ट्रोलॉजी को भी महत्व दिया जाने लगा है।
पैथालॉजिस्ट डॉ. कपिल सेठ के मुताबिक पहले केवल नाड़ी दोष और मांगलिक योग देखा जाता था, लेकिन अब परिवार ब्लड ग्रुप से लेकर थैलेसीमिया कैरियर और जेनेटिक डिसऑर्डर तक की जांच करवाकर विवाह के भविष्य को सुरक्षित करना चाहते हैं। फिजिशियन डॉ. संदीप जैन बताते हैं कि इस तरह की मेडिकल स्क्रीनिंग से दंपती के आने वाले जीवन में गंभीर बीमारियों की संभावना कम हो जाती है।
कई मामलों में टैरो कार्ड ने बड़े खुलासे भी किए। शास्त्रीनगर की एक युवती के विवाह की तैयारियां चल रही थीं। युवक की कुंडली और मेडिकल रिपोर्ट पूरी तरह सही थीं, लेकिन टैरो में ‘द टावर’ कार्ड निकलने पर लड़की वाले चिंतित हुए और रिश्ता तोड़ दिया। बाद में पता चला कि युवक पहले से शादीशुदा था।
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दिल्ली रोड निवासी सौरभ बताते हैं कि परिवार कुंडली मिलान कर रहा था, लेकिन उन्होंने खुद जेनेटिक टेस्ट भी कराया। उनका कहना है कि सात जन्मों का भविष्य कोई नहीं जानता, लेकिन इस जन्म में बीमारियों से तो बचा जा सकता है।
शहर में बढ़ते इस ट्रेंड से साफ है कि मेरठ में शादी सिर्फ ‘ग्रह-नक्षत्र’ से नहीं, बल्कि टैरो और मेडिकल साइंस के संतुलन से तय होने लगी है। परिवार अब रिश्तों को सिर्फ भावनाओं से नहीं, बल्कि सुरक्षित भविष्य की वैज्ञानिक गणना से भी जोड़कर देख रहे हैं।