मेरठ-हापुड़ लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम राजनीति बड़े नेताओं के धड़े में बंटी है। इन नेताओं के संरक्षण में राजनीति करने वाले जिला पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, पूर्व प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्यों के अपने-अपने गुट हैं। इन्हीं नेताओं के दम पर ये मुस्लिम नेता बड़े चुनावों को भी व्यक्तिगत चुनाव की तरह लेते हैं।
इस क्षेत्र में सपा के पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर, बसपा के याकूब कुरैशी, पूर्व सांसद शाहिद अखलाक के साथ ही राज्यसभा सदस्य और बसपा नेता मुनकाद अली के अपने-अपने गुट हैं। गठबंधन भले ही प्रदेश स्तर पर हुआ हो, लेकिन स्थानीय स्तर पर इन मुस्लिम नेताओं के समर्थक किसी दूसरे गुट का वर्चस्व कायम नहीं होने देंगे। इसी राजनीति में दूसरे के समर्थक प्रत्याशी को हराने में ये गुट कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहेंगे। ऐसे में इस गुटबाजी सो गठबंधन को नुकसान हो सकता है।
भाजपाई बोले - हमें मिलेगा फायदा
उत्तर प्रदेश उर्दू एकेडमी के सदस्य एवं भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष कुंवर बासित अली का कहना है कि 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद मुस्लिमों का रुझान भाजपा की तरफ शुरू हुआ था, लेकिन प्रदेश में योगी सरकार आने के बाद तो बड़ी संख्या में मुस्लिम भाजपा से जुड़ा है।
इसमें प्रमुख रूप से मुस्लिम राजपूतों की संख्या काफी है। बासित अली ने दावा किया कि मुस्लिमों के बीच आपसी वर्चस्व की जंग का फायदा कहीं न कहीं भाजपा को मिलेगा। अल्पसंख्यक मोर्चा के जिलाध्यक्ष दिलशाद चौहान का कहना है कि इस गठबंधन के बाद भाजपा को मुस्लिम वोटों का फायदा मिलेगा। 15 से 20 प्रतिशत तक मुस्लिम वोट भाजपा को जा सकता है।