विधायक और सांसदों की बैठक लेते राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह
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भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में भले ही शरणार्थियों को बसाने और घुसपैठियों को भगाने पर बात हुई हो, लेकिन कट्टर हिंदुत्व और स्थानीय मुद्दों पर भाजपा का अंदाज जुदा दिखा। अपनी छवि के विपरीत जाकर भाजपा इस चुनाव में पूरी तरह से जातिगत फार्मूला अपनाने जा रही है। खास तौर पर अगड़ों के साथ दलितों व पिछड़ों को लुभाने की पूरी मशक्कत दिखी।
बैठक के दोनों सत्र में यह साफ हुआ यह वर्ष 2019 का चुनावी शंखनाद है। तैयारी भी उसी तरह की थीं। एजेंडा बिल्कुल साफ था। राम मंदिर और कट्टर हिंदुत्व की बजाय इलेक्शन गेम प्लानिंग का पूरा खाका खींचा गया। दोनों दिन के सत्र में एक भी वक्ता ने लव जेहाद, घर वापसी, गो रक्षा, राम मंदिर जैसे मुद्दे पर कोई बात नहीं की। यह ऐसे मुद्दे हैं जिनके आधार पर भाजपा राजनीतिक आधार तय करती रही है, लेकिन इस बार नई योजना के साथ वह मैदान में है। पहले सत्र में सीएम योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री राजनाथ सिंह के भाषण ने यह साफ कर दिया था कि यूपी से ही इस बार की जीत का मार्ग तलाशा जा रहा है। युवाओं को जोड़ने पर जोर दिया और सीटों को बढ़ाने का दावा भी किया गया। विकास, कानून व्यवस्था, सुशासन जैसे मुद्दों की बात की गई। लेकिन टारगेट जातिगत समीकरण ही रहा। यूपी में खास तौर पर दलितों पर फोकस किया गया। अगड़ों के साथ पिछड़ों और दलितों का ऐसा कॉम्बिनेशन बनाया जा रहा है जिसके जरिए जीत की दहलीज तक पहुंचा जा सके।