नेहरूनगर नाले में डूबे 12 साल के गौरव को लेकर सरकारी तंत्र पूरी तरह से पस्त हो गया है। उसके मिलने की आस छोड़ दी गई है। बृहस्पतिवार को तलाशी अभियान नहीं चलाया गया। उधर, गौरव की मां को अभी भी अपने लाल के लौटने की आस है। परिजनों का कहना है कि सरकारी मशीनरी ने सही से तलाशी अभियान नहीं चलाया।
शनिवार को फूलबाग कॉलोनी निवासी 12 वर्षीय गौरव नेहरूनगर नाले में गिर गया था। घटना के तीन घंटे बाद निगम प्रशासन ने सर्च अभियान शुरू किया। अगले दिन दोपहर 12 बजे से घटनास्थल से रंगोली मंडप के बीच जगह-जगह जेसीबी से तलाश की गई। तीन दिन तक निगम कर्मचारियों ने सर्च अभियान तो चलाया, लेकिन केवल खानापूर्ति के लिए। बृहस्पतिवार को नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने अभियान पर ब्रेक लगवा दिया है।
दिन में कई बार चर्चा रही कि टीम एक बार फिर से अभियान चला रही है, जिस पर गौरव के परिजन भी दौड़े। लेकिन उन्हें कहीं भी अभियान चलता नहीं मिला। निराश परिजन नाले की खाक छानकर घर लौट गए।
हर आहट पर उठती हैं नजरें
गौरव की मां, मौसी और अन्य रिश्तेदार गुमसुम हैं। हर आहट पर सभी की निगाह दरवाजे की तरफ उठती हैं। मां कभी शून्य में निहारती है तो कभी धीमी आवाज में बड़बड़ाती है। परिजनों का कहना है कि गौरव को स्थानीय लोगों ने भी खूब ढूंढा, लेकिन यदि सरकारी टीम समय से अलर्ट होती तो शायद गौरव मिल जाता।
नाकामी पर ढकी आशंकाओं की चादर
नगर निगम अधिकारी अपनी नाकामी पर आशंकाओं की चादर ढक रहे हैं। मंगलवार को नगरायुक्त उमेश प्रताप ने नेहरूनगर नाले का निरीक्षण कर खानापूर्ति कर ली थी। इतना ही हीं उन्होंने तो यह तक आशंका जताई कि गौरव नाले में डूबा ही नहीं होगा। अधिकारियों ने यह नहीं सोचा कि यदि नहीं डूबा तो आखिर वह कहां है? दिल्ली रोड फ्लाई ओवर के पास नाले में जब पिछले साल एक बच्चा गिरा था तो वह अगले दिन तक नहीं मिला था। बाद में दबाव बना तो अभियान चलता रहा और तीसरे दिन बच्चे का शव एक किलोमीटर दूर संजय वन के पास मिला।
आखिर कब तक जान लेंगे ये नाले?
खुले नाले आखिर कब तक लोगों के लिए काल साबित होंगे। इस नाले की यह घटना तो हृदयविदारक है ही, इससे पहले भी इस तरह की घटनाएं हुई हैं। पिछले साल दिल्ली रोड पर फ्लाईओवर के निकट पॉलिथीन बीनने वाला बच्चा नाले में डूबा था। उसके चंद दिन बाद ही इसी नाले में उसकी जगह एक बाइक सवार गिर पड़ा और उसकी जान चली गई। पूरे शहर में नाले खुले हैं। इससे पहले भी यहां इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं पर कोई ठोस नीति इस बाबत नहीं बनाई जा रही है।