आज एपीजे अब्दुल कलाम हमारे बीच नहीं हैं। लेकिन उनकी यादें आज भी मेरठ वासियों के जेहन में जिंदा हैं। मिसाइलमैन आखिरी बार 6 मार्च 2014 को मेरठ आए थे। यहां उन्हें सरदार बल्लभ भाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था।
उनके संबोधन को आज भी लोग नहीं भूलते। कलाम इतनी आत्मीयता से स्टूडेंट्स से मिले थे कि उनके साथ गुजारे पलों को याद कर विश्वविद्यालय के छात्र भावुक हो जाते हैं। अपने संबोधन में कलाम ने कहा था 'लक्ष्य बड़ा और महान होना चाहिए,छोटा नहीं। जिसे अच्छी किताबों,अच्छे गुरु और अच्छे परिवेश से प्राप्त करना चाहिए।'
युवाओं में भरी थी प्रेरणा और जोश
मिसाइलमैन बच्चों से कहते थे कि आप अपना भविष्य नहीं बदल सकते लेकिन अपनी आदतें बदल सकते हैं और निश्चित रूप से आपकी आदतें आपका भविष्य बदल देंगी वह कहते थे कि परिश्रम इतना करों की असफलता के लिए कोई जगह न रहे।
मेरठ के राधा गोविंद इंजीनियरिंग कॉलेज में भी उन्हें आमंत्रित किया गया था। यहां उन्होंने युवाओं में प्रेरणा और जोश भरते हुए कहा कि अपने भीतर कुछ बेहतर करने की भूख रहनी चाहिए। जिस किसी ने भी बड़ा आविष्कार किया उसके मन में कुछ नया करने की भूख रही।
इसके बाद साल 1998 में भारत ने रूस के साथ मिलकर सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने का काम शुरू किया और ब्रह्मोस प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की गई। ब्रह्मोस मिसाइल धरती, आकाश और समुद्र कहीं से भी हमला करने में सक्षम है। मिसाइलों के क्षेत्र में भारत को मिली इस अद्भुत सफलता के बाद ही अब्दुल कलाम को मिसाइल मैन के नाम से जाना जाने लगा।
भारत रत्न से किए गए सम्मानित
वर्ष 2015 में आज (27 जुलाई) ही के दिन भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) शिलौंग में 'रहने योग्य ग्रह' विषय पर एक व्याख्यान के दौरान दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। वह एक जाने-माने वैज्ञानिक, अभियंता (इंजीनियर) और शिक्षक थे। उन्होंने 1974 में भारत द्वारा पहले मूल परमाणु परीक्षण के बाद से दूसरी बार 1998 में पोखरण में किए गए परमाणु परीक्षण में एक निर्णायक, संगठनात्मक, तकनीकी और राजनैतिक भूमिका निभाई थी।
देश के प्रति उनके समर्पण और भारत में तकनीकी के विकास में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए साल 1997 में उन्हें 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया था। हालांकि इससे पहले वो साल 1981 में देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म भूषण' और साल 1990 में 'पद्म विभूषण' पा चुके थे।
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