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मंत्री बोले, मेरठ समेत प्रदेश के हर अस्पताल में मिलेंगी एम्स जैसी सुविधाएं

Tue, 12 Dec 2017 05:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह के साथ अन्य नेता - फोटो : अमर उजाला
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सूबे के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि नॉन प्रैक्टिस अलाउंस (एनपीए) में बढ़ोतरी की बजाय सरकारी चिकित्सकों के लिए शाम की ओपीडी शुरू करने की योजना है। जल्द ही यह प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके लिए चिकित्सकों को प्रति मरीज पैसा दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि मेरठ और प्रदेश के हर जिले के सरकारी अस्पतालों में एम्स जैसी सुविधाएं देनी की तैयारी है। साथ ही वर्ल्ड बैंक से तय हुआ है कि उपकरण ही नहीं प्रदेश के 175 सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों की बिल्डिंग भी इस तरह बनाई जाए कि वह मैक्स और अपोलो जैसी दिखे।
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स्वास्थ्य मंत्री मेरठ-दिल्ली रोड पर सरकारी और निजी चिकित्सकों के एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि ग्रेटर नोएडा में एक हजार बेड का एक जगह चिन्हित की गई है, जिसे एम्स की तर्ज पर बनाने की तैयारी है। मेरठ के मेडिकल और जिला अस्पताल जल्द ही अपग्रेड किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका से आए उत्तर प्रदेश के एक युवक ने एप तैयार किया है, जिसमें चिकित्सकों और उनकी उपलब्धता का पूरा ब्यौरा है। इस एप को वे 13 दिसंबर को लॉन्च करेंगे।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में 22 करोड़ में से 11 करोड़ की जनता सरकारी अस्पतालों में जाती है। आठ हजार चिकित्सकों की कमी थी, जिसे दूर करने की कोशिश की जा रही है, पिछले आठ माह में चार हजार चिकित्सक आ गए हैं, ये बड़ी बात है। जो निजी चिकित्सक आना चाह रहे हैं उन्हें भी प्रस्ताव दिया गया है कि वे अपनी तनख्वाह बताएं और यूपी में आकर स्वास्थ्य सेवाएं दें। 35 जिले ऐसे रखे हैं, जिनमें वॉक इन इंटरव्यू कर चिकित्सक रखे गए हैं। इनमें ज्यादातर पूर्वांचल की वो जगह हैं, जहां चिकित्सक नहीं जाना चाहते। इसकेअलावा एक हजार बीडीएस चिकित्सकों को सीएचसी पीएचसी पर रखे जाने की तैयारी है। 1700 नए डॉक्टर यूपी में आ रहे हैं। 1800 आयुष केडॉक्टर ऐसी घूम रहे थे, इन्हें सीएचसी-पीएचसी पर तैनात किया गया है। चिकित्सकों की कमी को पूरा करने केलिए रिटायरमेंट की उम्र 60 से बढ़ाकर 62 कर दी गई है। फिलहाल वीआरएस नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों की स्थिति ऐसी है कि वहां मजबूरी में लोग जाते हैं, मगर इसमें सुधार किया जा रहा है, काफी सुधार कर लिया गया है। उन्होंनने कहा कि निजी चिकित्सकों और नर्सिंग होम को सरकारी योजनाओं में शामिल करने के लिए संशोधन केसाथ क्लीनिकल एस्टीब्लिशमेंट बिल को लागू करने की तैयारी है, इसका अवलोकन किया जा रहा है। पीपी मॉडल के तहत भी कई व्यवस्थाएं शुरू की जाएंगी, जिससे प्राइवेट चिकित्सकों को भी लाभ होगा।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना से साढ़े सात करोड़ को मिलेगा लाभ

स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह - फोटो : अमर उजाला
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना फिर से शुरू की जा रही है। इसे सपा सरकार ने राजनीतिक कारणों से बंद कर दिया था। वह इसे समाजवादी स्वास्थ्य बीमा योजना के नाम से शुरू करना चाह रही थी। अब इसे शुरू किया जा रहा है। इसके लिए 1200 अस्पताल रजिस्टर्ड करा दिए गए हैं। इसके तहत पहले 30 हजार रुपये तक का इलाज होता था,  अब ढाई लाख तक का इलाज होगा। इससे करीब साढ़े सात करोड़ लोग लाभांवित होंगे।

टेली मेडिसिन-टेली पैथोलॉजी-टेली रेडियोलॉजी शुरू की जा रही
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यूपी में जल्द ही टेली मेडिसिन, टेली पैथोलॉजी और टेली रेडियोलॉजी शुरू की जा रही है। इससे मरीजों की रिपोर्ट इंटरनेट केजरिए ऑनलाइन कर दी जाएगी।

चिकित्सकों पर कसेगा शिकंजा
प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों पर शिकंजा कसेगा। दो माह पहले इस संबंध में जीओ जारी किया गया था। इस मामले में छह लोगों पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसे अमली जामा पहनाया जा रहा है। अगर लापरवाही होगी तो कार्रवाई की ही जाएगी।

10-15 प्रतिशत चिकित्सक कर रहे पेशे को बदनाम
उन्होंने कहा कि राजनेता हों या अधिकारी या फिर जनता, अब चिकित्सकों की इज्जत कम करते हैं। सब इनकी इज्जत करें, यह जरूरी है, इस और कदम उठाए जा रहेहैं। हालांकि उन्होंने कहा कि इसके लिए 10 से 15 प्रतिशत चिकित्सक भी जिम्मेदार हैं, जो गलत कर पूरे पेशे को बदनाम कर रहे हैं। शीशे केसामने खड़े होकर डॉक्टर अपनी शपथ दोहराएं, ऐसे करेंगे तो बहुत समस्याएं खुद ही खत्म हो जाएंगी। उन्होंने एक उदाहरण दिया कि एक सीएमओ ने लापरवाही की तो उन्होंने उससे कहा कि वह अपने परिवार के साथ बैठकर अपनी शपथ दोहराएं, वह तीन दिन बाद उनके पास आया और पैर छूकर बोला कि आपने जो सीख दी है, वह तब नहीं मिलती, जब कोई दंड दे देते।

एक हजार जन औषधि केंद्र खोले जाएंगे
उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक हजार जन औषधि केंद्र खोले जाने हैं, जिनमें से 512 जनवरी तक ही खोल दिए जाएंगे जबकि बाकी अगले साल मार्च तक खोल दिए जाएंगे।

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