परतापुर स्थित पराग डेयरी में दूध की सप्लाई करने वाले उत्पादकों और सचिवों के सब्र का बांध सोमवार को टूट गया। करोड़ों रुपयों का बकाया भुगतान न होने से नाराज दर्जनों दुग्ध उत्पादक ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर डेयरी पहुंचे और मुख्य द्वार पर जमकर हंगामा किया। सुरक्षाकर्मियों द्वारा अंदर जाने से रोकने पर आक्रोशित किसान गेट पर ही धरने पर बैठ गए और डेयरी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंन अपनी ट्रैक्टर ट्राली को मेन गेट पर ही खड़ा कर दिया।
दुग्ध उत्पादक कमल शर्मा ने बताया कि पराग डेयरी पर किसानों का करोड़ों रुपया बकाया है। वर्ष 2024 और 2025 का करीब 5 महीनों का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। आरोप है कि शासन स्तर पर शिकायत करने के बाद केवल कुछ ही लोगों का भुगतान किया गया जबकि सैकड़ों उत्पादक अभी भी अपने पैसे के लिए भटक रहे हैं। समय पर पैसा न मिलने के कारण दुग्ध उत्पादकों को पशुओं के चारे और अन्य खर्चों में दिक्कत आ रही है, जिससे डेयरी की उत्पादन क्षमता भी लगातार गिर रही है।
फर्जी बीएमसी के जरिए भ्रष्टाचार का आरोप
हंगामे के दौरान दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति के प्रतिनिधि नोबिल खारी ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि जिले में फर्जी बीएमसी चलाकर धोखाधड़ी की जा रही है। शिकायत के बाद पीसीडीएफ (प्रादेशिक को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड) के प्रबंध निदेशक ने किला परीक्षितगढ़ में एक बीएमसी का निरीक्षण किया, जो जांच में फर्जी पाया गया। किसानों का आरोप है कि इन फर्जी केंद्रों के जरिए हेराफेरी कर असली दुग्ध उत्पादकों का आर्थिक उत्पीड़न किया जा रहा है।
जीएम के साथ 3 घंटे चली वार्ता
हंगामे की सूचना मिलते ही जीएम अविनाश सत्यार्थी ने प्रदर्शनकारियों को बातचीत के लिए अपने दफ्तर बुलाया। करीब तीन घंटे तक चली गहमागहमी के बाद जीएम ने जल्द भुगतान का भरोसा दिलाया। दुग्ध समितियों के सदस्य भुगतान की समस्या लेकर आए थे। कुछ उत्पादकों का भुगतान सोमवार को ही कर दिया गया है। जो भी शेष बकाया है, उसे जल्द से जल्द क्लियर कर दिया जाएगा। इस दौरान सलेख चंद, रणवीर सिंह, रोहित शर्मा, सुभाष सिंह, तुषार सचिन, आशू, ब्रिजेश, सुखपाल सिंह और सुधीर शर्मा सहित बड़ी संख्या में दुग्ध उत्पादक और सचिव मौजूद रहे।