एफएसडीए की खाद्य सुरक्षा प्रशासन की टीम ने दिवाली पर जो खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए थे, उनमें से 41 सैंपलों की रिपोर्ट आई है, जिनमें से 22 के सैंपल फेल निकले हैं। इनमें चमचम, बंगाली रसगुल्ला, बर्फी और बंगाली मिठाई में खतरनाक रंगों की मिलावट निकली है, यानि यह मिलावटी मिठाई बेची गई है और लोगों ने खाई भी है। हालांकि जो सैंपल फेल हैं, उनमें अब कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि इस तरह से सैंपलों की रिपोर्ट का क्या फायदा है जो चार-पांच महीने बाद आती हैं और उनमें मिलावट का पता चलता है, तब तक वह खाद्य पदार्थ इस्तेमाल हो चुके होते है।
जो सैंपल फेल निकले हैं, उनमें व्रत के चावलों का सैंपल किठौर से, कचरी का सैंपल धीरखेड़ा से, बर्फी का मोहिउद्दीनपुर से, बंगाली मिठाई और रसगुल्ला का प्रह्लाद नगर से, हल्दी पाउडर का जमना नगर से, चमचम के सैंपल सदर बाजार और कंकरखेड़ा से लिए गए थे। इन सभी सैंपलों को अनसेफ की श्रेणी में रखा गया है। यानी यह सेहत के लिए हानिकारक हैं। इनमें मेटानिल येलो, सिंथेटिक कलर, मिठाई को चमकाने के लिए ज्यादा मात्रा में फूड कलर और बर्फी पर चांदी के वर्क की जगह एल्युमिनियम का वर्क निकला है। इनके अलावा 10 सैंपल सब स्टैंडर्ड निकले हैं, यानी यह मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। वहीं, चार सैंपल मिस ब्रांड के निकले हैं।
एसीजेएम कोर्ट में चलेगा मुकदमा
एफएसडीए की अभिहित अधिकारी अर्चना धीरान ने बताया कि जो नमूने सेहत के लिए हानिकारक पाए गए हैं, उनमें एफआईआर दर्ज कर एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा चलता है। इसमें छह माह से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा के साथ ही तीन लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है।
गंभीर रोगों का कारण बन सकती है मिलावट
फिजिशियन डॉ. वीके बिंद्रा ने बताया कि रासायनिक रंगों, एल्युमिनियम आदि की मिलावट से गंभीर किस्म के रोग हो सकते हैं। सबसे ज्यादा किडनी को नुकसान पहुंच सकता है और पेट संबंधी कई तरह के रोग हो सकते हैं। रंगों की मिलावट और अखाद्य पदार्थों से बनी मिठाइयां और खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। लिहाजा इनसे सावधान रहने की जरूरत है।
चमकदार बनाने के लिए रंगों का प्रयोग
खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल गंगवार ने बताया कि खाद्य पदार्थों (रसगुल्ला या चमचम आदि) में खतरनाक रंगों की मिलावट इसलिए की जाती है, ताकि वह चमकदार और रंगीन लगें और लोग उन्हें खरीदने के लिए आकर्षित हों।
...नाम नहीं होगा सार्वजनिक
अभिहित अधिकारी अर्चना धीरान ने बताया कि विभाग से निर्देश मिले हैं कि जब तक इन मामलों में कोर्ट कोई फैसला नहीं देता है, तब तक ऐसे लोगों का नाम सार्वजनिक नहीं किया जाएगा, जिनके यहां मिलावट मिली है। क्योंकि इन लोगों को एक माह तक अपील करने का हक है। अभी तक लखनऊ की लैब से जांच रिपोर्ट आने के बाद ऐसे लोगों और उनकी दुकान का नाम सार्वजनिक कर दिया जाता था, जिनमें मिलावट पाई जाती थी।