विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान है यह
रुबेला जिसे जर्मन मिजिल्स (खसरा) भी कहा जाता है एक विषाणुजनित संक्रमण है। जितने लोगों को रुबेला होता है उनमें से करीब आधे लोगों को तो इसके कोई लक्षण महसूस नहीं होते, इसलिए उन्हें शायद पता भी नहीं चलता कि उन्हें रुबेला है।
लक्षणों की बात करें तो हल्का बुखार, बंद नाक या नाक बहना और गले में दर्द, आंखों में दर्द व संक्रमण आदि। कुछ दिनों बाद चेहरे और गर्दन पर लाल धब्बेदार चकत्ते उभर सकते हैं और इनमें खुजली भी हो सकती है। इसके बाद ये चकत्ते शरीर में और जगहों पर फैलते हैं।
इन स्कूलों ने किया टीकाकरण से इंकार
सेंट फेसिस पब्लिक स्कूल, एसडीआर पब्लिक स्कूल, डीके ग्लोबल स्कूल, अमेरिकन स्कूल, गार्गी स्कूल, सिटी प्राइवेट स्कूल, सिटी लुक पब्लिक स्कूल, वेंकेटवश्वरा स्कूल, नूर पब्लिक स्कूल, शिक्षा बाल ज्ञान भारती, एसवी पब्लिक स्कूल, ग्रीम चैंबर पब्लिक स्कूल, राम गुरु ग्लोबल स्कूल आदि स्कूलों ने टीकाकरण कराने से इंकार कर दिया है।
यह मदरसे भी कर रहे मना
मोहम्मदिया, मैरीफुल कुरान, फैज उल उलूम, सिदिकिया काजी मदरसा, बसीरुल इस्लाम, इस्लामाकि मदरसा, अलजा जामिया, एनएएम मदरसा, अरसा एन दारुल उलूम, कासिमिया दुरुल उलूम आदि 15 मदरसे भी टीकाकरण कराने से मना कर रहे हैं।
बच्चे स्वस्थ होंगे
मिजिल्स रुबेला टीकाकरण अच्छा अभियान है। इसमें सभी को शामिल होना चाहिए। बच्चे स्वस्थ होने चाहिए, ताकि वह बेहतर जिंदगी जी सकें। सेहत सबसे जरूरी है।
- हाजी याकूब कुरैशी, पूर्व मंत्री
यह टीका सुरक्षित है
पहले भी तमाम तरह की बीमारियां टीकाकरण से खत्म हुई हैं। लिहाजा मीजल्स (खसरा) रुबेला की इस वैक्सीन को लगवाएं। यह सुरक्षित हैं, इससे घबराएं नहीं।
- शाहिद मंजूर, पूर्व कैबिनेट मंत्री
यह बेहतर स्वास्थ्य के लिए है
जनता को भी इस अभियान में सहयोग करना चाहिए। यह किसी एक विशेष जाति या धर्म को लेकर दवाई तैयार नहीं की गई है, यह सभी के बेहतर स्वास्थ्य के लिए है।
- मा निलीमानंद, महामंडलेश्वर
अभियान का समर्थन करें
अच्छे अभियानों का सभी को समर्थन करना चाहिए, बच्चे स्वस्थ होंगे तो देश का मुस्तकबिल भी स्वस्थ रहेगा। किसी को कोई शंका है तो वह चिकित्सक से सलाह ले सकता है।
- हाजी शाहिद अखलाक, पूर्व सांसद
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