बंदरगाहों पर अटका लाखों टन माल
निर्यातकों के अनुसार करीब दो लाख टन बासमती चावल बंदरगाहों और परिवहन मार्गों में फंसा हुआ है। कंटेनर समय पर नहीं मिल पा रहे हैं और जहाजों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। इससे माल ढुलाई की लागत में भारी बढ़ोतरी हो गई है। जो कंटेनर भाड़ा पहले 1200 से 1800 डॉलर तक था, वह अब बढ़कर 2500 से 3500 डॉलर तक पहुंच गया है। बढ़ती लागत का सीधा असर निर्यात कारोबार पर पड़ रहा है।
पश्चिम उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर असर
मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर और आसपास के जिलों में बड़ी संख्या में बासमती प्रसंस्करण इकाइयां और चावल मिलें संचालित हैं। इनका बड़ा कारोबार खाड़ी देशों पर निर्भर करता है। निर्यात प्रभावित होने से उत्पादन और व्यापार दोनों प्रभावित हो रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि यदि तनाव और बढ़ा तो निर्यात आदेश रद्द होने और कारोबार ठप पड़ने जैसी स्थिति भी बन सकती है।
तीन माह बाद बढ़ सकती है मांग
बासमती निर्यात से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय धान की बुवाई का मौसम चल रहा है और नई फसल आने में दो से तीन माह का समय लगेगा। इस दौरान विदेशों में चावल का भंडार कम हो सकता है। ऐसे में भविष्य में अचानक मांग बढ़ने की संभावना है, जिससे किसानों और कारोबारियों को राहत मिल सकती है।